Rahul Gandhi Supreme Court नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के नेताओं अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी समेत तमाम विपक्ष के नेताओं ने सोमवार को नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च किया और SIR के फैसले को चुनौती देने के लिए याचिका दायर की.राहुल गांधी की याचिका अदालत में दाखिल होने के बाद आधिकारिक रूप से रजिस्टर भी हो गई.

Rahul Gandhi Supreme Court : इंडिया ब्लॉक की याचिका में सुप्रीम कोर्ट से की गई ये मांगे
“याचिका में चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) से जुड़े फैसलों के तरीके को चुनौती दी गई है. याचिका में चुनाव आयोग से विवादित फैसलों (जैसे 24 जून, 2025 को SIR शुरू करने का फैसला) से जुड़ी पूरी फाइलें, एजेंडा, मीटिंग के मिनट्स, नोटिंग और आपत्तियां, साथ ही ECINET और ERONET के एक्सेस लॉग्स सार्वजनिक करने की मांग की गई है. इसमें इस बात की न्यायिक जांच की भी मांग की गई है कि क्या ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून और ‘टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार लिए गए थे ?
याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि कोर्ट यह सुनिश्चित करे कि किसी भी वोटर का नाम बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए न हटाया जाए. साथ ही, हटाए गए वोटरों की सूची बूथ-वार प्रकाशित करने और उसमें नाम हटाने के कारण व डेमोग्राफिक जानकारी शामिल करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है. इसमें ECINET और ERONET सहित वोटर लिस्ट डेटाबेस में नाम हटाने और बदलावों की ऑडिट के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की भी मांग की गई है. याचिका में मामले के निपटारे तक चल रहे SIR पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है.
याचिका में विशेष रूप से कोर्ट से मांग की गई है कि वह ECI को निर्देश दे कि वह यह सुनिश्चित करे कि “स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न से जुड़ा चुनाव आयोग का हर फैसला 2023 के कानून के अनुसार लिया जाए और उसका विधिवत रिकॉर्ड (मिनट्स) रखा जाए।” इसमें यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि “कानून के अनुसार बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए वोटर लिस्ट से किसी भी वोटर का नाम न हटाया जाए.”
इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि विपक्ष SIR को केवल मतदाता सूची में संशोधन की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मताधिकार और चुनावी निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रहा है. वहीं, इस विवाद का कानूनी फैसला अब इस बात पर निर्भर करेगा कि अदालत चुनाव आयोग की शक्तियों और अपनाई गई प्रक्रिया को किस नजरिए से देखती है.
मार्च में राहुल गांधी के साथ 10 और विपक्षी नेता बने याचिकाकर्ता
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे,समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव,आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय समेत कुल 11 विपक्षी नेताओं के नाम शामिल हैं. अन्य याचिकाकर्ताओं में संजय राउत, एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं. चुनाव आयोग को याचिका में प्रतिवादी बनाया गया है.
सुप्रीम कोर्ट जाने की इंडिया ब्लॉक की रणनीति क्या हैं ?
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, लेकिन CJI से मुलाकात नहीं
सोमवार को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च किया। इस मार्च को ‘चलो दिल्ली—मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया गया था. विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई.
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात की विपक्ष की मांग स्वीकार नहीं हुई. सीजेआई सूर्यकांत ने सुबह की ये साफ कर दिया था कि पूर्व निर्धारित काम काज के कारण विपक्ष के नेताओं से उनकी मुलाकात नहीं हो पायेगी.इसके बाद विपक्ष ने याचिका के जरिए अपनी आपत्तियां अदालत के सामने रखने का रास्ता चुना.
मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर नेताओं और समर्थकों को आगे बढ़ने से रोका. इसके बावजूद याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत परिसर में याचिका दाखिल करने के लिए सीमित प्रतिनिधिमंडल को अनुमति दी गई थी.
SIR पर सियासी टकराव क्यों बढ़ रहा है?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है. चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नामों की समीक्षा करने और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है.
इसके उलट, विपक्ष ने इस प्रक्रिया के तरीके और उसके संभावित प्रभावों पर सवाल उठाए हैं. विपक्ष का आरोप है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
प्रोटेस्ट से निबटने के लिए प्रशासन की तैयारी ,6 मेट्रो स्टेशन बंद
INDIA ब्लॉक के मार्च को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सोमवार, 12 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक छह मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद रखने का फैसला किया था. बंद किए गए स्टेशनों में शामिल थे. पटेल चौक,जनपथ,राजीव चौक, मंडी हाउस,सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और बाराखंबा रोड.
मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां ऐसे समय में लगाई गईं, जब दिल्ली में पहले से ही विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर तनाव बना हुआ है. इसने प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर भी बहस तेज कर दी है.
CJP ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए मांगी तारीख
इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आशुतोष रांका और सौरव दास ने सोमवार को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन जाकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख तय करने की मांग की.
CJP ने चेतावनी दी है कि अगर दिल्ली पुलिस प्रदर्शन के लिए तारीख नहीं देती है, तो संगठन एक बार फिर आंदोलन का आह्वान करेगा. संगठन पहले भी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर चुका है.
इस घटनाक्रम से साफ है कि SIR का विरोध अब केवल प्रमुख विपक्षी दलों तक सीमित नहीं है. छात्र संगठनों और नागरिक समूहों की भागीदारी ने इसे व्यापक राजनीतिक और नागरिक अधिकारों की बहस का रूप दे दिया है.
विपक्ष के याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजर
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका दाखिल होने के बाद अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर हैं. जानकारी आ रही है कि विपक्ष के तेवर और लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखथे हुए सुप्रीम कोर्ट याचिका पर त्वरित सुनवाई कर सकता है. सीजेआई की तरफ से याचिका को जल्द लिस्ट करने की बात कही है.
राजनीतिक रूप से यह घटनाक्रम कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के लिए महत्वपूर्ण है. विपक्ष ने सड़क पर प्रदर्शन,चुनाव आयोग के खिलाफ इस्तीफे की मांग और न्यायिक हस्तक्षेप—तीनों रास्तों को एक साथ आगे बढ़ाया है. इससे SIR आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है, वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग की दलीलें और अदालत की समीक्षा इस विवाद की दिशा तय करेंगी. असली सवाल यह है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया किस तरह संचालित हो, ताकि चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता भी बनी रहे और किसी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार भी प्रभावित न हो.

