Reliance Share Price Drop : अगर आप रिलायंस के निवेशक हैं, तो आज का दिन आपके लिए किसी झटके से कम नहीं है. देश की सबसे बड़ी कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन ऐसा ‘भूकंप’ आया है, जिसने पूरे दलाल स्ट्रीट को हिला कर रख दिया है.
अरबपति मुकेश अंबानी की कंपनी का मार्केट कैप, जो अब तक आसमान छू रहा था, आज एक झटके में 18 लाख करोड़ रुपये के नीचे आ गया है. रिलायंस के शेयर में 5% तक की गिरावट दर्ज की गई.
Reliance Share Price Drop : कुछ घंटों में स्वाहा हुए अरबों रुपये
सोमवार सुबह रिलायंस का शेयर ₹1350 के मुकाबले ₹1359 पर खुला था. शुरुआत में लगा कि सब ठीक है लेकिन अचानक बाजार की चाल बदली और बिकवाली का ऐसा दबाव आया कि शेयर ₹1290 के स्तर पर जा गिरा.
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मार्केट वैल्यू: गिरकर ₹17.56 लाख करोड़ पर आई.
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52-वीक हाई: ₹1611 (आज यह अपने लो-लेवल की ओर बढ़ता दिखा).
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सालाना रिटर्न: पिछले एक साल में निवेशकों को 12% का रिटर्न दिया था.
क्यों आई गिरावट? ये है ‘ईरान कनेक्शन’
इस गिरावट की जड़ भारत में नहीं, बल्कि मिडिल-ईस्ट में छिपी है. अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 37 दिनों से जारी युद्ध के हालात और डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकियों ने वैश्विक बाजारों को डरा दिया है.
सबसे बड़ी चिंता: होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) दुनिया की सबसे बड़ी तेल सप्लाई लाइन ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इसके चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। रिलायंस का बड़ा हिस्सा ऑयल-टू-केमिकल (O2C) बिजनेस से आता है, इसलिए कच्चे तेल की महंगी दरें सीधे कंपनी के मुनाफे पर चोट कर रही हैं।
पूरा पेट्रोलियम सेक्टर ‘लाल’ निशान पर
ईरान-अमेरिका युद्ध की आग में केवल रिलायंस ही नहीं झुलस रहा है बल्कि पूरे सेक्टर की कमर टूट गई है. पेट्रोलियम उत्पादक कंपनी IOCL में 2.5% की गिरावट आई है वहीं BPCL, HPCL और ONGC के शेयर 2-2% तक टूट गये हैं.
क्या निवेशकों को घबराना चाहिए?
रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनी के लिए वैश्विक तनाव एक बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन जानकारों का मानना है कि कंपनी के फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं. जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. दोहर होते होते कंपनी के शेयर में सुधार दिखने लगे हैं. आपको बता दें कि ये पहला मौका नहीं है जब रिलायंस कंपनी के शेयर में गिरावट देखने के लिए मिली है.मार्च के अंत में भी ऐसी गिरावट देखी गई थी. इसलिए अन्य देशों से कच्चे तेल के आयात के विकल्पों के बीच उम्मीद है कि रिलायंस समेत भारतीय तेल कंपनियां जल्द ही एक बार फिर से ‘बाउंस बैक’ करेंगी.

