भारत पाकिस्तान सीजफऱायर में था अमेरिका का हाथ..पत्रकारों के सवाल का एस जयशंकर ने दिया जबर्दस्त जवाब

India-Pak Cease Fire : भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के सांसद और वरिष्ठ मंत्री इन दिनों दुनिया के अलग अलग देशों मे जाकर पाकिस्तान की पोल खोल कर रहे हैं.  भारत पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को लोग हैरानी से देख रहे है और इस पर अमेरिकी हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल हो रहे हैं, ऐसे में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी के एक अखबार को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने बेहद साफ तरीके से कहा कि युद्ध रोकने का पूरा श्रेय हमारी सेना के पराक्रम को जाता है.

India-Pak Cease Fire-दुनिया को अमेरिकी का शुक्रगुजार होना चाहिये ? 

यह पूछे जाने पर कि क्या विश्व को भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के लिए अमेरिका को धन्यवाद देना चाहिए, इस सवाल के जवाब में  विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि वह भारतीय शसस्त्र सेना को धन्यवाद कहैंगे, क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान को ये कहने पर मजबूर कर दिया कि “हम रुकने के लिए तैयार हैं.”

डॉ. जयशंकर ने जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर अलगेमाइन ज़ितुंग के साथ साक्षात्कार के दौरान भारत पाकिस्तान के बच चल रहे संघर्ष को लेकर उठे सवाल का जवाब दिया.

इंटरव्यू के दौरान पत्रकार ने विदेश मंत्री कह कि भारत पाकिस्तान के बछ शुरु हुई जंग को रोकने के लिए अमेरिका को धन्यवाद देना चाहिए ?  विदेश मंत्री ने इस सवाल के जवाब मे कहा कि दोनों देशो के बीच युद्ध विराम को लेकर जो सहमति बनी वो दोनों पक्षों के सैन्य कमांडरों के बीच सीधे संपर्क के माध्यम से गोलीबारी बंद करने पर सहमति बनी थी. एक दिन पहले ही भारत ने आधी रात को पाकिस्तान के कराची बंदरगाह के मुख्य एयरबेस और वायु रक्षा प्रणाली को बुरी तरह से निशाना बयाना था और उसे बर्बाद कर दिया. जयशंकर ने कहा कि ऐसे माहौल में  मुझे शत्रुता समाप्त करने के लिए किसे धन्यवाद देना चाहिए? मैं भारतीय सेना को धन्यवाद देता हूं क्योंकि यह भारतीय सैन्य कार्रवाई ही थी जिसने पाकिस्तान को यह कहने पर मजबूर कर दिया: हम रुकने के लिए तैयार हैं.”

10 मई को भारत और पाकिस्तान तीन दिनों तक सीमा पार संघर्ष के बाद युद्ध विराम पर सहमत हुए. भारत ने 7 मई को पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे पर हवाई हमले किए, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए थे. भारत ने जोर देकर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था, लेकिन पाकिस्तान ने भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिक क्षेत्रों पर सैकड़ों ड्रोन दागकर जवाब दिया. जवाबी कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिससे भारी नुकसान हुआ. इसके तुरंत बाद, पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने अपने भारतीय समकक्षों से संपर्क किया और युद्ध विराम पर सहमति बनी.

दरसअल ये सवाल भारतीय विदेश मंत्री से पूछ जाने का तात्पर्य ही यही था कि क्या वाकई में अमेरिकी राष्ट्रपति का सीजफायर कराने के दावे में सच्चाई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीजफायर का क्रेडिट लिया.हलांकि बाद में अपनी ही बात से मुकर गये. वहीं पाकिस्तान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने वाशिंगटन डीसी को धन्यवाद कहा था.

वही भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद साफ कर दिया था कि भारत-पाकिस्तान के बीच लडाई की स्थिति में अमेरिकी की भूमिका केवल चिंता व्यक्त करने वाले देश तक ही सीमित थी. जयशंकर ने कहा कि “हमने  बात करने वाले सभी लोगों, न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका बल्कि सभी से एक बात बहुत स्पष्ट कर दी थी कि अगर पाकिस्तानियों को लड़ाई बंद करनी है, तो उन्हें हमें बताना होगा. हमें उनसे यह सुनने की जरूरत है. उनके जनरल को हमारे जनरल को फोन करके यह कहना होगा और यही हुआ.”

यह पूछे जाने पर कि क्या संघर्ष विराम से संघर्ष से पहले की स्थिति बहाल हो गई है, डॉ. जयशंकर ने कहा, “हमने आतंकवादियों को स्पष्ट संकेत दिया है कि इस तरह के हमले करने की कीमत चुकानी होगी, जैसा कि उन्होंने अप्रैल में कश्मीर में हम पर किया था. इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी. हमने आत्मरक्षा में जवाबी गोलीबारी की और जब पाकिस्तानियों को समझ में आ गया कि वे नुकसानदेह रास्ता अपना रहे हैं, तो हम गोलीबारी रोकने में सक्षम हो गए. दो सप्ताह से यह स्थिति नहीं बदली है, यही स्थिति है.”

विदेश मंत्री से यह भी पूछा गया कि, “भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु संघर्ष से दुनिया कितनी दूर है?” इस पर विदेश मंत्री ने कहा कि सवाल से “हैरान” हैं. हम लोग  “परमाणु हथियार  के इस्तेमाल से बहुत दूर हैं.इंटरव्यू के दौरान जयशंकर ने कह कि मैं आपके सवाल से वाकई हैरान हूँ. हमारे पास आतंक का खत्मा ही लक्ष्य हैं. उन्होने बहुत सोच समझ कर सावधानीपूर्वक हम पर हमला किया था. उसके बाद, पाकिस्तानी सेना ने हम पर गोलीबारी की. हम उन्हें यह दिखाने में सक्षम थे कि हम उनकी वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय कर सकते हैं. फिर उनके अनुरोध पर गोलीबारी बंद हो गई. किसी भी बिंदु पर परमाणु स्तर तक नहीं पहुँचा. ”

 

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