LNG रिफाइनरी पर ईरान के हमले से तिलमिलाया कतर,अमेरिका को जम कर सुनाया

Middle East Energy Crisis : इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद भड़के ईरान ने सऊदी अरब, यूएई और कुवैत सहित पड़ोसी देशों के तेल-गैस ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया है. कतर एनर्जी के CEO साद अल-काबी के मुताबिक इस युद्ध के कारण जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई में करने मं उन्हें कम से कम 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है.

Middle East Energy Crisis: कतर को सबसे ज्यादा चोट

इजरायल द्वारा दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर किए गए हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट की आग को और भड़का दिया है. बुधवार रात अमेरिका की मदद से हुए इस हमले के जवाब में ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों पर मिसाइलें दागीं.

इस जवाबी कार्रवाई में सबसे अधिक नुकसान कतर को हुआ है. कतर की सरकारी तेल और गैस कंपनी कतरएनर्जी (QatarEnergy) के CEO साद अल-काबी ने बताया कि ईरान की मिसाइलों ने रास लाफान इलाके को निशाना बनाया, जो कतर के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का मुख्य केंद्र है.

सप्लाई चेन ठप, ठीक होने में लगेंगे 3 से 5 साल

कतर के ऊर्जा मंत्री और कतरएनर्जी के प्रमुख साद अल-काबी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में अमेरिका को जम कर सुनाया और बताया कि उनके काऱण कतर को कितना नुकसान हुआ है. रायटर्स से उन्होंने कहा:

“ईरान के हमले से समुद्री मार्ग से गैस सप्लाई करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी प्रणाली को भारी नुकसान हुआ है. इस तबाही को ठीक करने में 3 से 5 साल का समय लग सकता है.”

उन्होंने आगे बताया कि कतर को इस खतरे का पहले से ही अंदाजा था। अल-काबी ने दावा किया कि उन्होंने बार-बार अमेरिकी ऊर्जा मंत्री और साझेदार कंपनियों (ExxonMobil और ConocoPhillips) को चेतावनी दी थी कि ईरान के ठिकानों पर हमले का नतीजा गंभीर होगा.

व्हाइट हाउस की सफाई: “हमें रुकावटों का अंदाजा था”

इस तनावपूर्ण स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम को पता था कि ईरान में जारी ऑपरेशन के दौरान तेल-गैस की सप्लाई में बाधा आएगी. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने इन संभावित रुकावटों को ध्यान में रखकर पहले ही प्लानिंग कर ली थी.

वहीं, अमेरिकी कंपनी कोनोकोफिलिप्स (ConocoPhillips) ने कतर के साथ अपनी साझेदारी दोहराते हुए कहा है कि वे बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए कतरएनर्जी के साथ मिलकर काम करेंगे.

वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा

पिछले तीन हफ्तों से जारी इस युद्ध में मिसाइल और ड्रोन हमलों ने टैंकरों, रिफाइनरियों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को तहस-नहस कर दिया है. जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही स्थिति पर काबू नहीं पाया गया, तो दुनिया भर में गैस और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है.

Latest news

Related news