PM Modi Assam गुवाहाटी/डिब्रूगढ़: असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर है. राज्य की सत्ता पर तीसरी बार काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सबसे बड़े ‘ट्रंप कार्ड’ पीएम नरेंद्र मोदी को मैदान में उतार दिया है. बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी खुद असम के चाय बागानों के बीच पहुंचे और मजदूरों व स्थानीय लोगों से सीधा संवाद किया. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी इस बार समाज के सबसे निचले स्तर तक अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में है.
#PMModi आज Dibrugarh के चाय बागान में 🔥
👉 PM ने महिलाओं से बातचीत कर उनके काम और संस्कृति को करीब से जाना
👉 चाय पत्ती तोड़ने के बाद चर्चा और एक यादगार सेल्फी 📸#AssamElection2026 #BJPSankalp4VikasitAssam pic.twitter.com/HldO7MkxSS
— Survey Sarva (@Survey_Sarva) April 1, 2026
PM Modi Assam : ऊपरी असम की 40 सीटों पर टिकी बीजेपी की जीत
असम की कुल 126 विधानसभा सीटों में से बीजेपी का सबसे ज्यादा ध्यान ऊपरी असम की 40 सीटों पर है. पार्टी को भरोसा है कि यह इलाका सत्ता की राह आसान करेगा.
वजह: यहाँ असम के मूल निवासियों की आबादी अधिक है.
मुद्दा: बांग्लादेशी घुसपैठ और बाहरी लोगों की बसावट यहाँ हमेशा से बड़ा चुनावी मुद्दा रही है.
पुराना रिकॉर्ड: 2021 के चुनावों में इन 40 सीटों में से कांग्रेस को महज 5 सीटों पर सिमटना पड़ा था.
अवैध कब्जे और ‘पहचान की राजनीति’ का दांव
बीजेपी सरकार ने पिछले कार्यकाल में घुसपैठियों के खिलाफ कड़े अभियान चलाए हैं. सरकार का दावा है कि उसने करीब डेढ़ लाख बीघा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया है और वोटर लिस्ट से 50 हजार संदिग्ध नामों को बाहर किया है. बीजेपी को उम्मीद है कि ‘असमिया पहचान’ की यह राजनीति उसे एक बार फिर भारी बहुमत दिलाएगी.
एंटी-इनकम्बेंसी की काट: 19 विधायकों के कटे टिकट
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार की रैली में कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे विकास विरोधी बताया. वहीं, संगठन के स्तर पर बीजेपी ने बड़ा जोखिम लेते हुए 19 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं. एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को खत्म करने के लिए पार्टी ने शिवसागर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जैसे अहम जिलों में नए चेहरों पर दांव लगाया है.
कांग्रेस का ‘महागठबंधन’ बनाम बीजेपी का UCC दांव
विपक्ष में खड़ी कांग्रेस ने इस बार सीपीएम, सीपीआई, असम जातीय परिषद और रायजोर दल के साथ मिलकर एक मजबूत मोर्चा तैयार किया है. कांग्रेस को उम्मीद है कि स्थानीय दलों का साथ उसे हर वर्ग का वोट दिलाएगा.
दूसरी ओर, बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में UCC (समान नागरिक संहिता) लागू करने का वादा कर यह साफ कर दिया है कि वह अपने वैचारिक मुद्दों से पीछे हटने वाली नहीं है. अब देखना यह होगा कि 9 अप्रैल को असम की जनता पीएम मोदी के विकास और पहचान के मुद्दे पर मुहर लगाती है या विपक्ष के गठबंधन पर.





