Oil Prices Rise : अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक का उछाल आ गया है.
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सप्लाई प्रभावित
ईरान ने रणनीतिक रूप से होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण मजबूत कर दिया है. यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मार्ग के बंद होने से सैकड़ों तेल टैंकर और मालवाहक जहाज फंस गए हैं, जिससे सप्लाई बाधित हुई है और कीमतों में तेजी आई है.
ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा
सोमवार को एशियाई बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने के लिए मिला.
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ब्रेंट क्रूड की कीमत 12 प्रतिशत बढ़कर लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई.
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शुक्रवार को यह कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी.
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वहीं निमेक्स लाइट स्वीट क्रूड में भी तेजी दर्ज की गई.
सप्लाई कम होने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है.
जनवरी से अब तक 20% बढ़ चुके हैं दाम
साल 2026 की शुरुआत से ही तेल की कीमतों में तेजी का रुख देखा जा रहा है. जनवरी से अब तक अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जारी रहता है, तो ऊर्जा लागत और बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक महंगाई पर भी असर पड़ेगा.
भारत पर भी पड़ेगा असर
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें से काफी सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती है. ऐसे में इस मार्ग के बाधित होने से भारत की तेल आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार:
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पेट्रोल की कीमत पर लगभग ₹0.55 प्रति लीटर का दबाव
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डीजल पर ₹0.52 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी का असर संभव
आम लोगों और उद्योगों पर बढ़ेगा बोझ
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से कई सेक्टर प्रभावित होंगे, जिनमें शामिल हैं:
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एविएशन सेक्टर
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पेंट और केमिकल इंडस्ट्री
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टायर और लुब्रिकेंट कंपनियां
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ट्रांसपोर्ट सेक्टर
इन सेक्टरों की लागत बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है.
सरकार उठा सकती है कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार आम लोगों को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती या तेल कंपनियों के मार्जिन कम करने जैसे कदम उठा सकती है.

