El Nino Alert : दुनियाभर में मौसम को प्रभावित करने वाली प्राकृतिक घटना अल नीनो (El Nino) एक बार फिर चिंता का कारण बनती नजर आ रही है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने सैटेलाइट डेटा के आधार पर चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली अल नीनो तेजी से विकसित हो रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के कई देशों के मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा.

El Nino Alert: NASA के सैटेलाइट ने दर्ज की समुद्र में बढ़ती गर्मी
NASA के सेंटिनल-6 माइकल फ्रेलिच (Sentinel-6 Michael Freilich) सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के स्तर में असामान्य वृद्धि दर्ज की है. वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र का स्तर सामान्य से अधिक होना इस बात का संकेत है कि समुद्र के भीतर बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है.
गर्म पानी फैलता है, जिससे समुद्र की सतह ऊपर उठ जाती है. यही स्थिति अल नीनो के विकास की प्रमुख पहचान मानी जाती है.
Super El Niño is underway: NASA map confirms warmer-than-normal water temperatures in the equatorial Pacific – with devastating consequences https://t.co/5S7Iyv3e6s
— Daily Mail (@DailyMail) June 22, 2026
क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो एक जलवायु संबंधी घटना है, जो तब उत्पन्न होती है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसके कारण वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और कई देशों में सूखा, अत्यधिक गर्मी या असामान्य बारिश जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं.
अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA (नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन) ने 11 जून को आधिकारिक रूप से अल नीनो की शुरुआत की पुष्टि की थी.
1997 के ‘गॉडजिला अल नीनो’ जैसी बन रही स्थिति
वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर की वर्तमान स्थिति काफी हद तक वर्ष 1997 के ऐतिहासिक और अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो से मेल खाती है. 1997-98 का अल नीनो इतना प्रभावशाली था कि उसे “गॉडजिला अल नीनो” नाम दिया गया था.
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा संकेत बताते हैं कि यह नया अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले महीनों में इसका प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है.
सैटेलाइट मैप में दिखी खतरनाक तस्वीर
NASA की जेट प्रोपल्शन लैब (JPL) द्वारा तैयार किए गए समुद्री नक्शे में 8 जून की स्थिति दर्शाई गई है. नक्शे में:
- लाल रंग समुद्र के ऊंचे स्तर और अधिक गर्मी वाले क्षेत्रों को दिखाता है।
- सफेद रंग सामान्य स्थिति को दर्शाता है।
- नीला रंग समुद्र के कम स्तर वाले हिस्सों को प्रदर्शित करता है।
सैटेलाइट ने समुद्र के भीतर बनने वाली विशाल केल्विन वेव्स (Kelvin Waves) को भी रिकॉर्ड किया है। ये गर्म पानी की विशाल लहरें होती हैं, जो सैकड़ों मील तक फैल सकती हैं और अल नीनो को और मजबूत बनाने में भूमिका निभाती हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
अल नीनो का सबसे बड़ा प्रभाव भारत के मानसून पर पड़ सकता है. आमतौर पर मजबूत अल नीनो की स्थिति में भारत में मानसूनी बारिश कमजोर पड़ने की आशंका रहती है. इससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और जल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है.
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो और अधिक मजबूत होता है, तो देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है. इससे हीटवेव की घटनाएं बढ़ सकती हैं और बिजली की मांग में भी वृद्धि हो सकती है.
अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है. ऐसे में यदि मानसून कमजोर रहता है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत अल नीनो की स्थिति में कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने की जरूरत होगी.
NASA और NOAA के ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो रहा है. यदि यह आने वाले महीनों में और मजबूत होता है, तो दुनिया के साथ-साथ भारत के मौसम, मानसून और अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है. ऐसे में मौसम वैज्ञानिक लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं और आने वाले समय में स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी.

