Friday, February 13, 2026

MP Assembly Election 2023: मध्यप्रदेश में नरेंद्र सिंह तोमर बने संयोजक, ज्योतिरादित्य सिंधिया का क्या होगा?

दिल्ली   मध्यप्रदेश में बीजेपी ने एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्री और एमपी से आने वाले वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर  को प्रदेश में चुनाव की कमान सौंपी गई है.कयास लगाये जा रहे थे कि बीजेपी इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) को मध्यप्रदेश में ये कमान सौंपेगी.

बीजेपी मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटी है. मध्यप्रदेश में अंदर खाने आ रही खबरों और एंटी इनकंबेसी की संभावनाओं को देखते हुए सत्तारुढ बीजेपी अपनी तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं रखना चाहती है.यही कारण है कि दिल्ली ने मध्य प्रदेश के लिए बनी चुनाव समिति मे एक और महत्वपूर्ण नाम जोड़ा है. कांग्रेस से आये नेता की जगह अपने पुराने और अनुभवी नेता को चुनाव अभियान का संयोजक नियुक्त किया है .

नरेंद्र सिंह तोमर चुनाव प्रबंध समिति के संयोजक बने

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शानिवार को केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) को मध्यप्रदेश चुनाव के लिए प्रदेश का संयोजक नियुक्त किया. इससे पहले बीजेपी आला कमान ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को मध्यप्रदेश में चुनाव प्रभारी नियुक्त किया था. अब इन दोनो के साथ वरिष्ठ नेता नरेंद्र तोमर(Narendra Singh Tomar) को प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाया है.

सिंधिया के लिए तोमर के आने के मायने?

बीते मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) अचानक भोपाल पहुंचे थे और वहां बैठक में सबसे ज्यादा मुखर ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ही दिखे थे. गृहमंत्री शाह के भोपाल बैठक से पहले सिंधिया ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल  से मुलाकात की, बाद में अमित शाह के साथ ही दिल्ली वापस आये. अगले दिन ही फिर से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने लोकसभा क्षेत्र शिवपुरी का दौरा किया. इन सब से प्रदेश में ये अनुमान लगाया जाने लगा था कि आलाकमान ज्योतिरादित्य को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं, लेकिन चुनाव प्रबंध समिति के लिए आलाकामान ने अपने पुराने वरिष्ठ नेता  नरेंद्र सिंह तोमर को चुना.

नरेंद्र सिंह तोमर की नियुक्ति सिंधिया के लिए झटका ?

दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर मध्यप्रदेश के एक ही इलाके ग्वालियर-चंबल से आते हैं. सूत्रों की माने तो पार्टी की अंदरुनी रिपोर्ट में ग्वालिर-चंबल क्षेत्र में बीजेपी की हालत खराब है.  इसलिए यहां पार्टी को एक ऐसे नेता की जरुरत है जिसके लिए आम सहमति हो. वहीं आमतौर पर  सिंधिया को नरेंद्र सिंह तोमर के प्रतिद्वंदी के तौर पर देखा जाता है.  सिंधिया की सबसे बड़ी समस्या ये रही है कि अक्सर इनके खिलाफ राज्य में भाजपा के नेता गोलबंदी कर लेते हैं. मध्यप्रदेश के निकाय चुनावों में यही स्थिति देखने के लिए मिली थी. इसलिए नरेंद्र सिंह तोमर की नियुक्ति ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए एक झटका माना जा रहा है.

कयास ये भी लगाये जा रहे हैं कि तोमर के आने के बाद सिंधिया समर्थक उम्मीदवारों के टिकट पर असर पड़ेगा और टिकट बंटबारे मे नरेंद्र सिंह तोमर की भूमिका बड़ी होगी. ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए आने वाले दिनों में रास्ता मुश्किल होगा.

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