मोरबी दुर्घटना का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई गई है. याचिका चीफ जस्टिस यूयू ललित के कोर्ट में लगाई गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने मामला सुनने के लिए 14 नवंबर की तारीख तय की है. याचिका में मांग की गई है कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज के नेतृत्व में कराई जाये.
मोरबी में रविवार की शाम हुई दुर्घटना में अब तक 134 लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी है और कई लोग अस्पताल में मौत से जूझ रहे हैं.प्रधानमंत्री मोदी आज मोरबी पहुंचे .134 लोगों की मौत का शोक मना रहा मोरबी प्रशासन प्रधानमंत्री मोदी के आने से पहले अस्पताल के रंगरोगन और स्वागत के लिए तैयारियां करता दिखा.
SHAME ON @Bhupendrapbjp SHAME ON @NarendraModi In a terrible crisis like #Morbi .. you guys are decorating a hospital like its Diwali.. You are preparing for a celebration by Modi.. Your poor character, you negligence.. all comes out in a crisis.. You are spitting on the victims pic.twitter.com/ofRRAj2Ry3
— PolitiCrooks (@PolitiCrooks) November 1, 2022
सोशल मीडिया पर तमाम तरह से संदेश आ रहे हैं जिसमें दिख रहा है कि किस तरह से पीएम मोदी के स्वागत के लिए रंगरोगन और साफ सफाई चल रही है.
ઓ હો હો …. મોરબીમાં માતમ નહિ લોકાર્પણ છે સિવિલ હોસ્પિટલનું #morbi #CivilHospital #bridge @sanghaviharsh @Bhupendrapbjp @narendramodi @PMOIndia @CMOGuj pic.twitter.com/r8E5k0iw2T
— GSTV (@GSTV_NEWS) November 1, 2022
इस बीच एक सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या इस मामले में किसी को बचाने की कवायद चल रही है. सोमवार को केबल ब्रिज हादसे में जो FIR दर्ज हुआ है उसमें कहीं भी पुल की मरम्मत करनेवाली कंपनी का नाम तक नहीं है. केवल कहा गया है कि पुल की मरम्मत का काम ठीक से नहीं हुआ इसलिए ये हादसा हुआ है.पुल की मरम्मत का ठेका लेने वाली कंपनी ओरेवा का और उसके किसी वरिष्ठ अधिकारी का नाम तक नहीं है. केवल सुरक्षा गार्ड और टिकट काटने वालों का नाम FIR में दर्ज किया गया है.

