Tuesday, February 17, 2026

चांद पर हुआ चमत्कार, फिर जिंदा हुआ Chandrayaan, भेजने लगा तस्वीरें, एक्सपर्ट्स हुए हैरान

पिछले साल अगस्त महीने में भारत के चंद्रयान -3 (Chandrayaan-3) को तब सफलता मिली जब चन्द्रमा की दक्षिणी ध्रुव पर सफल लेंडिंग हुई थी. दुनियाभर से ISRO की प्रशंसा हो रही थी. इसके बाद जापान ने मून मिशन लॉन्च किया था. हालांकि लैंडिंग मन के अनुसार नहीं हुई, जिसकी वजह से माना जाने लगा कि जापान का चंद्रयान ज्यादा वक़्त तक चांद पर जिंदा नहीं रहेगा, लेकिन तीसरी बार उसने चमत्कार कर दिया. जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के मुताबिक उसका स्नाइपर लेंडर यानी कि जापान का चंद्रयान तीसरी बार जिंदा हो गया. उसने तस्वीरें भी भेजी है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि चंद्रमा पर 14 दिनों तक अंधेरा रहता है और तापमान के काफी नीचे चले जाने की वजह से मून मिशन के ज्यादा लंबे समय तक चलने की उम्मीद नहीं रहती.

कठिन परिस्थिति को सहन करने की नहीं थी उम्मीद

जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के मुताबिक जापान के मून स्नाइपर लेंडर ने तीसरी बार बाधाओं को पार किया है, और वह ऐसी कठोर परिस्थिति को सहन करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था. इसके बाद भी वह चन्द्रमा की एक लंबी और ठंडी रात में भी जीवित रह गया. नासा के अनुसार चांद पर जब रात होती है, तब वहां का तापमान शून्य से 208 डिग्री फ़ारेनहाइट तक गिर जाता है. CNN की रिपोर्ट के अनुसार जापान के मून स्नाइपर से एक चंद्र रात को भी झेलने की उम्मीद नहीं थी.

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चांद पर जाने वाला पांचवा देश बना था जापान

जब इस साल की शुरुआत में जापान का चंद्रयान चांद पर उतरा था, तब यह दुनिया की पांचवा देश बन गया था, जिसने चन्द्रमा पर लेंडिंग की थी. अंतरिक्ष यान शियोली क्रेटर के पास उतरा था. जो चंद्र भूमध्य रेखा के पास एक क्षेत्र, ट्रैंक्विलिटी सागर के लगभग 200 मील दक्षिण में स्थित है, जहां अपोलो 11 ने पहली बार इंसानो को चंद्रमा पर उतारा था, लेकिन जैसा की वैज्ञानिक चाहते थे, उस तरह से सबकुछ नहीं हो सका था.

लेंडिंग के दौरान, जापान के अंतरिक्ष यान में एक गड़बड़ी हो गई थी और उसके सौर पैनल सीधे होने के बजाय पश्चिम की ओर थे और उन्हें बिजली उत्पन्न करने के लिए जरूरी सूर्य का प्रकाश नहीं मिल रहा था. लेंडर के पास बंद होने से पहले इमेजेस को भेजने के लिए पर्याप्त ऊर्जा थी. जापान में मिशन की टीम को उम्मीद थी एक बार जब सूरज की रोशनी फिर से सोलर पैनल तक पहुंच जाएगी तो अंतरिक्ष यान फिर से जाग सकता है.

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