Thursday, January 22, 2026

Manoj Tiwari: धोनी से पूछना चाहूंगा कि शतक बनाने के बाद भी मुझे भारतीय टीम से क्यों बाहर कर दिया गया

भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना हर खिलाड़ी का सपना होता है. इसके लिए वह जी तोड़ मेहनत करता है. ऐसा नहीं है कि एक बार टीम इंडिया में जगह मिल जाए तो खिलाड़ी सुरक्षित हो जाता है. उसे टीम इंडिया में बने रहने के लिए लगातार परफॉर्म करना होता है.

पूर्व भारतीय खिलाड़ी Manoj Tiwari ने 2008 में भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया था, मगर वह लंबे समय तक नीली जर्सी में नहीं खेल पाए. हैरानी की बात तो यह है कि उन्हें शतक लगाने के बावजूद टीम से ड्रॉप कर दिया गया था. अब रिटायरमेंट के बाद इस खिलाड़ी का दर्द छलका है.

Manoj Tiwari ने अपने करियर का सबसे बड़ा अफसोस बताया

तिवारी ने हाल ही में रणजी ट्रॉफी में बिहार के खिलाफ अपना आखिरी मुकाबला खेलकर क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया है. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने करियर का सबसे बड़ा अफसोस दुनिया के साथ शेयर किया है. इस दौरान उन्होंने पूर्व कप्तान एमएस धोनी के साथ रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों को भी लपेटे में लिया.

एमएस धोनी से पूछना चाहेंगे कि शतक बनाने के बावजूद उन्हें भारतीय टीम से क्यों बाहर कर दिया गया

12 वनडे मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दाएं हाथ के बल्लेबाज ने एक भावनात्मक खुलासा किया है कि वह एमएस धोनी से पूछना चाहेंगे कि शतक बनाने के बावजूद उन्हें भारतीय टीम से क्यों बाहर कर दिया गया. खासकर ऑस्ट्रेलिया के उस दौरे पर जहां कोई भी रन नहीं बना रहा था, न ही विराट कोहली, रोहित शर्मा या सुरेश रैना. अब मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है. तिवारी ने चेन्नई में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी 104 रन की पारी का जिक्र किया, जहां उन्होंने भारतीय टीम को जीत दिलाई थी. इस पारी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी मिला था.

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इस बारे में उन्होंने कहा, “मुझे भारत के लिए टेस्ट कैप नहीं मिली. जब मैंने 65 फर्स्ट क्लास मैच खेले थे, तब मेरी बैटिंग औसत 65 के आसपास थी. तब ऑस्ट्रेलिया टीम ने भारत का दौरा किया था और मैंने एक फ्रेंडली मैच में 130 रन बनाए थे, फिर मैंने इंग्लैंड के खिलाफ एक फ्रेंडली मैच में 93 रन बनाए. मैं बहुत करीब था, लेकिन उन्होंने मेरी बजाय युवराज सिंह को चुना. इसलिए टेस्ट कैप नहीं मिलना और शतक बनाने के बाद मुझे 14 मैचों के लिए बाहर कर देना. जब आत्मविश्वास अपने चरम पर होता है और कोई उसे नष्ट कर देता है, तो यह उस खिलाड़ी को मार डालता है.

 

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