महानदी जल विवाद पर CM साय का बड़ा बयान,बोले-बहुत जल्द सुलझेगा मामला;माझी से हुई मुलाकात

Mahanadi Water Dispute:छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल बंटवारे का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. दोनों राज्यों के बीच बातचीत और तकनीकी स्तर पर विचार-विमर्श के जरिए समाधान तलाशने के प्रयास जारी हैं.30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठक भी हुई थी. केंद्र सरकार ने इस बैठक को सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था.

Mahanadi Water Dispute:28 सितंबर की सुनवाई से पहले अहम बैठक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओडिशा यात्रा के दौरान मोहन चरण माझी से मुलाकात ऐसे समय हुई, जब महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित बताई गई है. दोनों राज्यों की तकनीकी टीमों की बैठक भी 21 सितंबर को प्रस्तावित थी.

जुलाई में नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विवाद का समाधान दिवाली से पहले होने की उम्मीद जताई थी.

क्या है महानदी जल विवाद?

महानदी जल विवाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच नदी के पानी के बंटवारे और उपयोग से जुड़ा अंतरराज्यीय विवाद है. दोनों राज्यों के बीच यह मुद्दा एक दशक से अधिक समय से चर्चा और कानूनी प्रक्रिया का विषय रहा है.

ओडिशा का पक्ष

ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी के ऊपरी हिस्से में बनाए गए बैराज और अन्य जल संरचनाओं से नदी के निचले हिस्से में पानी के प्रवाह पर असर पड़ता है. राज्य ने नदी के जल उपयोग और प्रवाह को लेकर आपत्तियां उठाई हैं.

छत्तीसगढ़ का पक्ष

छत्तीसगढ़ का कहना है कि वह महानदी के पानी में अपने हिस्से का ही उपयोग करता है. राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि ओडिशा अपने हिस्से में उपलब्ध जल का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाया है.

दोनों राज्यों के दावों और जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से बातचीत और कानूनी प्रक्रिया चल रही है.

2018 में गठित हुआ महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण

ओडिशा के अनुरोध के बाद केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था. यह गठन अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत किया गया.

केंद्र की पहल से बातचीत को मिला जोर

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2026 में हुई बैठक में दोनों राज्यों ने संवाद, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के माध्यम से सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई थी.

केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में विस्तारित तकनीकी समिति का गठन भी किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा सरकारों के प्रतिनिधि शामिल हैं. समिति का उद्देश्य बचे हुए तकनीकी मुद्दों पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाना है.

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