Thursday, February 19, 2026

लखनऊ: यजदान बिल्डर्स की इमारत गिराई जाये या नहीं, हाइकोर्ट की बेंच में आज होगी सुनवाई

लखनऊ (LUCKNOW)

याजदान बिल्डर्स (YAZDAAN BUILDERS)के फ्लैट खरीदारों ने सोमवार को इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच में धव्स्तीकरण के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसपर कोर्ट में आज सुनवाई  होगी. नजूम की जमीन पर बने याजदान बिल्डर के इस रिहायसी इमारत को lDA ने गिराने के आदेश दिये हैं.

लखनऊ विकास प्राधिकरण(LDA) के वीसी का कहना है कि खरीदारों को धोखा दिया गया है. इस लिए बिल्डिंग पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटकी है. जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने सुनवाई के दौरान लखनऊ विकास प्राधाकिरण के काउंसिल से कहा कि मंगलवार को सुनवाई  होने तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ना करें.

लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी इंद्रमणि त्रपाठी ने कहा है कि बिल्डर ने खरीददारों के साथ धोखा किया है , इसलिए खरीदारों से कहा गया कि वो रेरा (RERA) में अपील करें. रेरा के जरिये उनको मुआवजा मिल सकेगा. LDA वीसी ने कहा कि या तो बिल्डर सीधे पैसा वापस करे या आरसी काट कर वसूली की जायेगी. LDA की तरफ से खरीददारों को प्लैट खरीदने के ऑफर भी दिये गये हैं.LDA की तरफ से खरीददारों से कहा गया है कि पहले आओ पहले पायो के तहत फ्लैट दिये जायेंगे, जैसी फिनिशिंग चाहेंगे, वैसा करके देने की कोशिश की जायेगी.

आपको बता दें कि लखनऊ में बने याजदान बिल्डजर्स के फ्लैट की रजिस्ट्री हो चुकी है.अथोरिटी की मंजूरी के बाद लोग इस सोसायटी में रह भी रहे हैं. लेकिन अब लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इसे गिराना शुरु कर दिया है. जब बिल्डिंग पर बुलडोजर चलने के लिए आया तो सोसायटी के लोगों न बवाल किया . यहा तक की कई लोगों ने बिल्डिंग से कूदने तक की कोशिश की. सोमवार को कोर्ट के आदेश के बाद ध्वस्तीकऱण की कार्रवाई सुनवाई तक के लिए रुकी है.

याजदान बिल्डर्स का कहना है कि 2016 में इस सोययटी को बनाने के लिए अथोरिटी से मंजूरी मिली, बिल्डिंग रेरा से अप्रूव है. 36 लोगों के मकान की रजिस्ट्री हो चुकी है और कई परिवार यहां रह भी रहे हैं. 6 साल से बिल्डिंग बन रही थी जब अथोरिटी को याद नहीं आई और अब एकाएक रात को पुलिस बल पहुंची और बिल्डिंग को गिराने की कार्रवाई शुरु कर दी गई. यहां रह रहे परिवारों के जबर्दस्ती निकाला गया .

क्यों तोड़ी जा रही है बिल्डिंग ?

दरअसल ये बिल्डिग नजूम की जमीन पर बना है,बिल्डर का कहना है कि  इसका 25% शुल्क उन्होंने जमा कर दिया था. 2019 कोविड के बाद से नजूल विभाग में काम नहीं हो रहा था. इसलिए बाकी पैसा जमा नहीं किया जा सका था.

जिनके घरों की रजिस्ट्री हो चुकी है वो मकानमालिक अभी से पैसा जमा करने के लिए के लिए तैयार  हैं लेकिन एकाएक LDA के ध्वस्तीकऱण के आदेश से घर दहशत में हैं और उन्हें घर से बेघर होने का डर सता रहा है..LDA के इसी कार्रवाई के खिलाफ लोग हाइकोर्ट पहुंचे हैं.

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