राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव बुधवार को पटना में “दही चूड़ा” कार्यक्रम में अपने बिछड़े बेटे जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप यादव Tej Pratap Yadav से फिर मिले. हलांकि इस आयोजन में छोटे बेटे तेजस्वी यादव शामिल नहीं हुए
पिता लालू यादव, राज्यपाल और कई गणमान्य हुए शामिल
इन दोनों के साथ कई अन्य प्रमुख नेता भी शामिल हुए, जिनमें बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, आरएलजेपी प्रमुख पशुपति कुमार पारस, बिहार के मंत्री विजय चौधरी, संजय झा और अन्य शामिल थे।
#WATCH | Patna, Bihar: On Makar Sankranti celebrations at his residence, Jan Shakti Janata Dal leader Tej Pratap Yadav says, “Lalu ji came, Governor Arif ji came and blessed us. We have to take blessings from the elderly and then start our Yatra across Bihar.
On being asked if… pic.twitter.com/785WtJ4omT
— ANI (@ANI) January 14, 2026
आरजेडी का विलय जनशक्ति जनता दल में होगा- Tej Pratap Yadav
रिपोर्टर्स से बात करते हुए तेज प्रताप ने कहा कि “दही चूड़ा” से जुड़ा एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया और उन्हें अपने पिता का आशीर्वाद मिला.
तेज प्रताप यादव ने रिपोर्टर्स से कहा, “अगर तेजू भैया की दावत सुपर डुपर हिट नहीं होगी, तो किसकी होगी… दही-चूड़ा की एक शानदार दावत का आयोजन किया गया… हमारे माता-पिता हमारे लिए भगवान हैं, इसलिए हमें उनका आशीर्वाद मिलता रहेगा… सब लोग आएंगे.”
इस मौके पर तेज प्रताप यादव ने दावा किया की, लालू यादव की असली पार्टी जनशक्ति जनता दल है. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को आरजेडी का विलय जनशक्ति जनता दल में कर देना चाहिए.
जो परिवार बिखरा हुआ था, वह एक साथ आएगा- पशुपति पारस
इस बीच, RLJP प्रमुख पशुपति कुमार पारस ने कहा कि मकर संक्रांति के मौके पर नए समीकरण बनते हैं और जो परिवार बिखरा हुआ था, वह एक साथ आएगा.
उन्होंने ANI को बताया, “14 जनवरी आ गई है, जो भी ग्रह थे, वे खत्म हो गए हैं. आज से एक नया समीकरण बनेगा. जो लोग परिवार में बिखरे हुए थे, वे एक साथ आएंगे। बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आएगा.”
मकर संक्रांति खासकर खाया जाता है दही चूड़ा
दही चूड़ा, जिसे दोई चिरे भी कहा जाता है, एक पारंपरिक, बिना पका हुआ और हेल्दी नाश्ता या स्नैक है जो बिहार और पूर्वी भारत में बहुत खाया जाता है. इसे चपटे चावल (चूड़ा या पोहा) को ताज़े दही के साथ मिलाकर और गुड़ या चीनी से मीठा करके बनाया जाता है, अक्सर इसमें केले और मेवे जैसे फल भी डाले जाते हैं.
यह डिश खासकर मकर संक्रांति जैसे त्योहारों के दौरान बहुत लोकप्रिय है, जहाँ इसे सूर्य भगवान को आभार, समृद्धि और अच्छे भाग्य के प्रतीक के रूप में चढ़ाया जाता है.

