JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक से भड़के छात्र नेता, देवेंद्र महतो बोले- ‘धोखा दिया तो होगा जेपी आंदोलन’

Devendra Mahto on HC Decision रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं परीक्षाओं और इनके जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है. गुरुवार को आए इस फैसले से 44 दिनों से आंदोलन और 16 दिनों से अनशन कर रहे छात्रों को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट के इस आदेश के बाद छात्र आंदोलन की अगुवाई कर रहे देवेंद्र नाथ महतो ने राज्य सरकार की मंशा और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों के साथ छल हुआ तो यह विरोध जेपी आंदोलन की तर्ज पर बड़े जनआंदोलन में बदल जाएगा.

Devendra Mahto on HC Decision:‘सरकार की नीयत में लीपापोती की बू’

हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि वे न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं. उन्हें उम्मीद है कि हाई कोर्ट पेपर लीक, धांधली और अपारदर्शिता जैसे मुद्दों पर लाखों जुझारू छात्रों को न्याय जरूर देगा.

हालांकि, उन्होंने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब हाई कोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका दिया, तो सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल (AG) क्यों अनुपस्थित थे? सरकारी अधिवक्ता ने सीआईडी (CID) की जांच रिपोर्ट को मजबूती से क्यों नहीं रखा? इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार मामले में लीपापोती करने की कोशिश कर रही है.”

‘हमारा मकसद योग्य छात्रों की नौकरी छीनना नहीं’

छात्र नेता ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष कभी किसी निर्दोष या योग्य छात्र का हक मारने का नहीं रहा. उनका मकसद राज्य में एक ऐसी निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रणाली स्थापित करना है, जहां भ्रष्टाचार और अनियमितता की भेंट किसी की मेहनत न चढ़े.

उन्होंने कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह एक स्पष्ट लकीर खींचे, जिससे गलत तरीके से नौकरी पाने वाले दागियों को बाहर किया जा सके और योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हो.

15 सितंबर को फिर सुनवाई, दी जेपी आंदोलन की धमकी

महतो ने कहा कि 15 सितंबर को हाई कोर्ट में सरकार को फिर से अपना पक्ष और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अवसर मिला है. पूरा झारखंड इस पर नजर बनाए हुए है.

उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, “अगर 15 सितंबर को भी सरकार ने कोताही बरती या लीपापोती की, तो छात्र इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे। जो आंदोलन अब तक शांतिपूर्ण था, वह फिर से शुरू होगा। हम अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार हैं, लेकिन धोखा बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि जरूरत पड़ी तो यह संघर्ष जेपी आंदोलन की तर्ज पर पूरे राज्य में व्यापक जनआंदोलन का रूप लेगा.”

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