ईरान ने रुस-चीन से मांगी ‘सुरक्षा की गारंटी’,ट्रंप के वादे पर है भरोसा कम…

Iran-US Ceasefire तेहरान/बीजिंग: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच पिछले 40 दिनों से जारी भीषण जंग पर बुधवार सुबह अस्थायी विराम लग गया है. दोनों पक्ष 15 दिनों तक एक-दूसरे पर हमला ना करने पर सहमत हुए हैं. हालांकि, इस सीजफायर के बावजूद ईरान का रुख काफी कड़ा है और उसने स्पष्ट किया है कि उसे अमेरिका के वादों पर भरोसा नहीं है.

Iran-US Ceasefire : चीन और रूस बनें ‘शांति के गारंटर’

बीजिंग में ईरान के राजदूत अब्दुलरेजा रहमानी फजली ने कहा कि अमेरिका का पुराना रिकॉर्ड वादाखिलाफी का रहा है. उन्होंने मांग की है कि चीन और रूस जैसे शक्तिशाली देश इस शांति समझौते के गारंटर बनें. फजली ने कहा, “हमें उम्मीद है कि चीन और रूस यह सुनिश्चित करेंगे कि अमेरिका दोबारा युद्ध शुरू न करे.”

होर्मुज स्ट्रेट पर बड़े फैसले की उम्मीद

राजदूत फजली ने बताया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर फिलहाल 3,000 जहाज गुजरने का इंतजार कर रहे हैं. ईरान दबाव कम करने के लिए कदम उठाएगा, लेकिन स्ट्रेट पूरी तरह खुलेगा या नहीं, यह शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर निर्भर करेगा. ईरान इस रूट पर ‘ट्रांजिट फीस’ लगाने पर भी विचार कर रहा है.

चीन-रूस ने निभाया ‘सच्चे दोस्त’ का फर्ज

ईरान ने चीन और रूस को अपना ‘सच्चा दोस्त’ बताते हुए उनका आभार व्यक्त किया है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अरब देशों द्वारा होर्मुज स्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव पर चीन और रूस ने वीटो कर दिया था. इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 देशों ने वोट किया था, जबकि पाकिस्तान और कोलंबिया मतदान से दूर रहे थे.

ट्रंप का बयान और ईरान की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संघर्षविराम में चीन की मध्यस्थता को स्वीकार किया है. वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इस बार समझौता टूटा, तो अमेरिका को ऐसा कड़ा जवाब मिलेगा कि उसे पछताना पड़ेगा. ईरान का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका की हार हुई है, जिसे वह छिपाने की कोशिश कर रहा है.

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