Saturday, November 29, 2025

सांसद इकरा हसन के साथ ADM ने किया दुर्व्यवहार,एडीएम के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश

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 Iqra Hasan : कैराना से समाजवादी पार्टी की लोकप्रिय सांसद इकरा हसन से दुर्व्यवहार के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इकरा हसन ने सांसद के साथ दुर्व्यवहार के मामले में एडीएम एडीएम संतोष बहादुर सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवा की मांग की थी जिसके बाद प्रशासन ने विभागीय जांच के आदेश दिये हैं.

 Iqra Hasan के साथ एडीएम ने कैसे किया दुर्व्यवहार ?

“गेट आउट!! यह ऑफिस मेरा है, मैं जो चाहूं वो कर सकता हूं…” यही वो शब्द  हैं जो  एक अधिकारी ने एक वर्तमान लोकसभा सांसद से कहा. 

घटना 1 जुलाई दोपहर 3 बजे की है ,जब कैराना सांसद इकरा हसन और छुटमलपुर नगर पंचायत अध्यक्ष शमा एडीएम संतोष बहादुर सिंह से मिलने  के लिए उनके कार्यालय पहुंची. जब वहां पहुंची तो उन्हें कहा गया कि एडीएम लंच पर हैं. अपनी समस्याएं पत्र के माध्यम से दे दें. लेकिन सांसद इक़रा हसन ने एडीएम ‘साहब’  से व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्याएं रखने की बात कही.

3 बजे ADM साहब से इक़रा की मुलाकात हुई.इस दौरान उन्होने एडीएम संतोष बहादुर से स्थानीय मुद्दों पर बता करने की कोशिश की जिसपर एडीएम भड़क गये और उन्होंने सांसद इकरा हसन और पंचायत अध्यक्ष शमा को  कार्यालय से अभद्रतापूर्वक बाहर जाने के लिए कहा. इकरा हसन का दावा है कि – ADM संतोष बहुदर ने उनसे और पंचायत अध्यक्ष शमा से कहा – “गेट आउट!! यह ऑफिस मेरा है, मैं जो चाहूं वो कर सकता हूं…”

घटना के बारे में इकरा हसन ने क्या कहा ?

कैराना सांसद इकरा हसन ने कहा कि मुझे सांसद बने करीब एक साल हो चुका है. पहले भी हमलोग जनता के बीच रहते थे.कभी किसी अधिकारी ने इस तरह का दुर्व्यवहार नहीं किया. हमने भी कभी किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की. सांसद ने आरोप लगाया कि उनके पहुंचने पर एडीएम सिंह का व्यवहार “सम्मानजनक नहीं” था.

 अपने सांसद के अपमान पर अखिलेश यादव आये सामने

इकरा हसन के साथ हुई बदतमीजी को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव  भी खुलकर ,मने आये. उन्होंने ADM संतोष बहादुर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. अखिलेश यादव ने X पर लिखा है कि

“जो सांसद का सम्मान नहीं करते वो जनता का क्या करेंगे”

मामले को गर्मता देख प्रशासन ने आरोपी अधिकारी संतोष बहादुर सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिये हैं.

उत्तर प्रदेश में ये पहला मामला नहीं है. केवल विपक्ष के नेता ही नहीं कई बार तो सत्ता पक्ष के नेता विधायर और मंत्री तक ये आरोप लगाते दिखे हैं कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते हैं.

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