मिडिल ईस्ट जंग में हूती विद्रोहियों की एंट्री से हालात गंभीर…अब एक सुमुद्री रास्ता हो सकता है बंद

Middle East War Houthis :मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है. अब तक ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे इस संघर्ष में यमन के हूती विद्रोही सीधे तौर पर शामिल नहीं हुए थे लेकिन शनिवार को उन्होंने पहली बार मिसाइल दागकर युद्ध में अपनी एंट्री का ऐलान कर दिया.

Middle East War Houthis:हूती विद्रोहियों के निशाने पर इजराइल के सैन्य ठिकाने  

हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने इजरायल के संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है हालांकि इजरायल ने इन हमलों को नाकाम बताते हुए कहा कि यमन से दागी गई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया.

युद्ध का दायरा बढ़ने से नए खतरे आये सामने

 बीते चार सप्ताह से जारी इस मिडिल इस्ट युद्ध से पहले ही वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सीमित करने के बाद अब एक और अहम समुद्री रास्ता खतरे में आ गया है. वो रास्ता है ‘बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य’

बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य’  का ये रास्ता लाल सागर के मुहाने पर स्थित है और इसी रास्ते से  यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक तेल और गैस सप्लाई की जाती है. हूतियों के इस युद्ध में उतर जाने के बाद इस रास्ते के भी बंद होने की आशंका बढ़ गई है.

बाब-अल-मंडेब क्यों है इतना अहम?

बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. इसी रास्ते से होकर जहाज स्वेज नहर के जरिए भूमध्य सागर तक पहुंचते हैं. वैश्विक व्यापार का करीब 12-15% प्रतिशत माल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. खाड़ी देशों का तेल और गैस इसी रास्ते से  यूरोप तक  पहुंचता है. हूतियों के पास एंटी-शिप मिसाइल, क्रूज मिसाइल और समुद्री ड्रोन जैसे अत्याधुनिक हथियार हैं, जिससे इस समुद्री रास्ते पर  खतरा और बढ़ गया है.

कौन हैं हूती विद्रोही?

हूती यमन के शिया मुस्लिम जैदी समुदाय का एक सशस्त्र समूह है, जिसकी स्थापना बदरद्दीन अल हूती ने की थी. इस विद्रोही संगठन को ईरान की शिया सरकार का समर्थन प्राप्त है. इन लोगों ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था और आज भी यमन के  बड़े हिस्से पर इनका नियंत्रण है. हूती खुद को “अंसार अल्लाह” यानी अल्लाह के साथी कहते हैं और अमेरिका और इजरायल के कट्टर विरोधी माने जाते हैं.

तीन तरफ से घिरा इजरायल

ईरान के साथ जिस खुशफहमी के साथ इजराइल और अमेरिका ने हमली शुरु कर दिया था , वो खुशफहमी अब टूट कर बिखरती नजर आ रही है. ईरान और इनके सहयोगियों ने इस समय इजरायल पर तीन दिशाओं से घेर रखा है. एक तरफ गाजा में हमास सक्रिय है, वहीं दूसरी तरफ लेबनान से हिजबुल्लाह के हमले हो रहे है और अब समुद्र के रास्ते तीसरी तरफ से यमन के हूती विद्रोहियों की  मिसाइलें इजराइल को निशाना बना रही है. ऐसे में युद्ध के और लंबा खिंचने विनाश की  आशंका बढ़ गई है.

ईरान और अमेरिका ने एक दूसरे को दी चेतावनी

ईरान ने सनसनीखेज दावा किया है कि उसने दुबई में अमेरिकी सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाया. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को चेतावनी दी कि यह क्षेत्र “अमेरिकी सैनिकों के लिए कब्रगाह” बन सकता है.

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास अभी भी ईरान पर हमले के लिए हजारों लक्ष्य बाकी हैं. उन्होंने NATO सहयोगियों पर निशाना साधते हुए उन्हें “कागजी शेर” बताया और कहा कि जरूरत के समय वे साथ नहीं देते.

अमेरिकी नौसेना की ताकत बढ़ी

तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी समुद्र में अपनी  सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. अमेरिकी सबमरीन शिप USS George H.W. Bush को तैनात किया गया है , वहीं USS Gerald R. Ford और USS Abraham Lincoln पहले से इरान की खाड़ी में मौजूद है. ताजा स्थिति में अमेरिकी ने कई मिसाइल विध्वंसक भी क्षेत्र में भेजे हैं.

ईरान के राष्ट्रपति की अमेरिका को चेतावनी  

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि अगर देश के आर्थिक या रणनीतिक ठिकानों पर हमला हुआ, तो जवाब बेहद कड़ा होगा. उन्होंने क्षेत्रीय देशों से अपील की है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दें.  इस बीच हूती विद्रोहियों की एंट्री से मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति और जटिल बन गई है. अब यह सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर तेल सप्लाई और व्यापार के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है.

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