Middle East Countries Angry : ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल के युद्ध का आज 7वां दिन है. 7 दिन के संघर्ष के बाद भी इसमें कोई कमी आती दिखाई नहीं दे रही है. अमेरिका अपनी पूरी ताकत के साथ ईरान पर हमले कर रहा है, वहीं ईरान इन हमलों का ना केवल जवाब दे रहा है बल्कि खाड़ी के देशों में अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी हमले कर रहा है.
Middle East Countries Angry: निशाने पर खाड़ी के देश
ईरान लगातार खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर उसे बर्बाद कर रहा है इसके साथ ही खाड़ी के देशों Saudi Arabia, United Arab Emirates, Qatar और Kuwait जैसे देशों के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले करके इन देशों की कमर तोड़ने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड रहा है.
खाड़ी के देशों में शुरु हुई अमेरिका की मुश्किल
ईरान के लगातार जवाबी कार्रवाई से निबटने के लिए अमेरिका हर दिन नई रणनीति बना रहा है लेकिन अब खबर है कि खाड़ी के देशों में भी अमेरिका के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. अमेरिका खाड़ी के देशों जैसे साउदी अरब, यूएई, कतर , बहरीन और कुवैत के एयरस्पेस और नेवल बेस के भरोसे ईरान से युद्द लड़ रहा है लेकिन अब खाड़ी के देशों ने अमेरिका को लेकर नाराजगी है .
खाड़ी के देशों की अमेरिका से नाराजगी
मिडिल इस्ट के देश जैसे साउदी अरब ,कतर, यूएई का कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला करने से पहले उनके साथ बातचीत नहीं की, उन्हें भरोसे में नहीं लिया. अब जब ईरान पलटवार कर रहा है तो सबसे अधिक नुकसान इन देशों को ही हो रहा है. ईरान के पलटवार से त्रस्त अरब देशों की अमेरिका से नाराजगी बढ़ती जा रही है.
पहले पता होता तो हम तैयारी करते – अरब देश
खाड़ी के लगभग सभी देशों ( साउदी अरब, कतर ,यूएई बहरीन) की शिकायत है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध तो शुरु कर दिया लेकिन शायद अब वाशिंगटन को भी नहीं पता है कि ये युद्ध कब तक चलेगा. ऐसे में अगर अमेरिका ने इन खाड़ी के अपने रणनीतिक साझेदार देशों को भरोसे में लिया होता, उनसे बातचीत की होती तो उन्हें भी अपने बचाव के लिए तैयारी करने का मौका मिल जाता.
अमेरिका के कार्यशैली से खाड़ी के देश नाराज !
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ‘खाड़ी के दो देशों के अधिकारियों ने कहा कि उनकी सरकारें अमेरिका के युद्ध को संभालने के तरीके से निराश हैं, खास तौर पर 28 फरवरी को ईरान पर हुए शुरुआती हमले से. इन देशों का कहना है कि अमेरिका-इजरायल के हमले की सूचना उन्हें पहले से नहीं दी गई , जिसके कारण उन्हें अपनी तैयारी करने के मौका नहीं मिला. इतना ही नही अमेरिका ने उनके द्वारा दी गई चेतावनियों को भी दरकिनार कर दिया. अमेरिका को पहले ही बता दिया गया था कि अगर युद्ध हुआ तो इसके परिणाम पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होंगे.
समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी के देशों की शिकायत और नाराजगी इस बात से भी है कि अमेरिकी सेना ने उनके हितों की परवाह नहीं कर रही है, उनकी रक्षा नहीं कर रही है. खाड़ी देशों को लगता है कि अमेरिका इजराइल के ऑपरेशन का पूरा ध्यान केवल इजरायल और अमेरिकी सैनिकों की रक्षा पर केंद्रित है. खाड़ी के देशों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है. खाड़ी देशों के पास हमले रोकने वाले इंटरसेप्टर्स भी तेजी से खत्म हो रहे हैं, जिसकी उनको चिंता सता रही है.सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने सीएनएन (CNN) से कहा कि ‘ये नेतन्याहू का युद्ध है. उन्होंने किसी तरह राष्ट्रपति (ट्रंप) को अपने विचारों का समर्थन करने के लिए मना लिया.’
खाडी़ के देशों की सबसे बडी समस्यया उनके तेल के निर्यात का रुक जाना भी है. ईरानी हमलों के कारण इन देशो से होने वाले तेल की सप्लाई भी प्रभावित हो गई है.
खाड़ी के देशों का मानना है कि अमेरिका- इजराइल से बदले की आग में जल रहे ईरान के लिए उनके देश आसान टारगेट्स हैं क्योंकि ये उनके पास मौजूद कम दूरी की मिसाइलें उनके हथियारों की रेंज में आ जाते हैं. इन देशों में अमेरिकी सेना के बेस भी हैं.

