DK Shivakumar, Bangluru : कर्नाटक की राजनीति में आज (3 जून 2026) एक बहुत बड़ा अध्याय लिखा गया है. कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ और कद्दावर नेता डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) ने आखिरकार कर्नाटक के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है.
Heartiest congratulations to Shri D.K. Shivakumar ji on taking oath today.
His unwavering commitment to the Congress ideology, tireless dedication to the people of Karnataka, and steadfast loyalty through every challenge have brought him to this moment. @DKShivakumar pic.twitter.com/c6R94guJyH
— Srinivas BV (@srinivasiyc) June 3, 2026
DK Shivakumar पावर शेयरिंग फॉर्मूले के तहत बने मुख्यमंत्री
यह बदलाव साल 2023 के विधानसभा चुनाव के समय आलाकमान द्वारा तय किए गए “पावर शेयरिंग फॉर्मूले” (सत्ता के बंटवारे) के तहत हुआ है. तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफा देने के बाद, ठीक 3 साल बाद राज्य की कमान अब पूरी तरह से डीके शिवकुमार के हाथों में आ गई है.
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं:
दिल्ली में बनी सहमति और सिद्धारमैया का इस्तीफा
इस सत्ता हस्तांतरण (Power Transfer) की पटकथा मई के आखिरी हफ्ते में दिल्ली में लिखी गई. निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मैराथन बैठकें कीं.
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पार्टी का निर्देश: राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के पुराने कड़वे अनुभवों से सबक लेते हुए, कांग्रेस आलाकमान ने बेहद शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता बदलने का फैसला किया.
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बलिदान और सम्मान: राहुल गांधी की सलाह पर सिद्धारमैया ने 28 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। पार्टी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका (या राज्यसभा सीट) की पेशकश की है।
‘संकटमोचक’ से ‘कप्तान’ तक का सफर
डीके शिवकुमार को कर्नाटक में कांग्रेस का सबसे मजबूत संगठनकर्ता माना जाता है. 2023 के चुनावों में कांग्रेस को 224 में से 135 सीटें दिलाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज कराने में प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनकी सबसे अहम भूमिका थी.
क्यों खास हैं डीके शिवकुमार: वह वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जो कर्नाटक की राजनीति का एक बेहद रसूखदार और मजबूत वोट बैंक है। इसके अलावा देश भर में जब भी कांग्रेस पर कोई राजनीतिक संकट आया, डीके शिवकुमार ने हमेशा आगे बढ़कर विधायकों को एकजुट रखने और सरकारें बचाने का काम किया। अब उन्हें उनकी इसी वफादारी और मेहनत का इनाम मिला है।
नया मंत्रिमंडल और सामाजिक समीकरण (Power Equations)
बेंगलुरु के लोक भवन में आयोजित इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेता मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शामिल हुए. राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने के लिए इस बार सरकार का ढांचा कुछ इस तरह तैयार किया जा रहा है:
मुख्यमंत्री- (CM)डीके शिवकुमारउप-
मुख्यमंत्री (Deputy CM)- राज्य में 2 से 3 डिप्टी सीएम बनाए जाने की प्रबल संभावना है, जिसमें सबसे पहला और वरिष्ठ नाम डॉ. जी. परमेश्वर का चल रहा है ताकि दलित समुदाय को साधा जा सके.
कैबिनेट विस्तार मुख्यमंत्री के साथ 13 मंत्रियों ने पहले चरण में शपथ ली है, जिसका बाद में और विस्तार किया जाएगा.
आगे की चुनौतियाँ और राह
मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद डीके शिवकुमार के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ होंगी:
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गारंटी योजनाओं को जारी रखना: सिद्धारमैया सरकार द्वारा शुरू की गई पांच प्रमुख लोक-कल्याणकारी “गारंटी योजनाओं” को वित्तीय संतुलन बिगाड़े बिना आगे बढ़ाना.
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पार्टी में एकजुटता: सिद्धारमैया और शिवकुमार के समर्थकों के बीच अंदरूनी तालमेल बनाए रखना ताकि विपक्ष (भाजपा) को सरकार पर हमला करने का कोई मौका न मिले.
फिलहाल, कांग्रेस ने इस सत्ता हस्तांतरण को बेहद सहज तरीके से अंजाम देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कर्नाटक में “ऑल इज वेल” (सब कुछ ठीक) है और पार्टी एकजुट होकर 2028 के अगले विधानसभा चुनावों की तैयारी करेगी.

