Monday, June 29, 2026
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90 साल के रिटायर्ड एयर फोर्स डॉक्टर से 2.5 करोड़ की ठगी, ठगों ने 25 दिनों तक रखा “डिजिटल अरेस्ट”

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Digital fraud of Rs 2.5 crore
Digital fraud of Rs 2.5 crore

Digital fraud of Rs 2.5 crore : मामला मध्यप्रदेश के ग्वालियर  का है, जहां  90 साल के एक रिटायर्ड एयरफोर्स के डाक्टर से डिजिटल ठगी की गई. डॉ.नारायण महादेव टिकेकर को साइबर ठगों ने 25 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और इस दौरान उनसे लगभग 2.5 करोड़ रुपये ठग लिए.

Digital fraud of Rs 2.5 crore : डरा धमकाकर एक महीने तक किया टार्चर 

पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआत बीते महीने 25 जनवरी  को हुई, जब पीड़ित डॉ.नारायण को एक फोन आया. कॉल करने वाले ने खुद को CBI  का अधिकारी बताया और कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारी है जो उन्हें (डाक्टर नाराय़ण) मुश्किल में डाल सकते हैं.

फोन करने वाले ने दावा किया कि डॉ. नारायण का नाम और कुछ अन्य दस्तावेज़ किसी अवैध मनी लॉन्ड्रिंग और  फ्रॉड के मामले मेँ इस्तेमाल किये गये हैं. इसी मामले में जाच हो रही है और उन्हें जानकारी हासिल करने के लिए फोन किया गया है. जांच में अगर कुछ संदिग्ध पाया गया तो उनकी गिरफ्तारी हो सकती है और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

ठगों ने डॉक्टर दंपत्ति पर वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी बनाये रखा , दबाव बनाया  और परिवार के  दूसरे सदस्यों को कुछ ना बताने की सलाह दी. उन्होने कहा कि ऐसा करना इसलिए जरुरी है, क्योंकि  सरकारी जांच में गोपनीयता बनाये रखना जरुरी है.

समय समय पर जांच के नाम पर ठग 90 साल के बुजुर्ग डॉक्टर से पैसों की मांग करते रहे.डॉ.नाराय़ण ने अपने अलग अलग खातों से निकालकर ढ़ाई करोड़ से अधिक की रकम ठगों को ट्रांसफर कर दी. बताया जा रहा है कि यह ट्रांसफर 25-27 दिनों में कई किस्तों में हुआ.

कैसे सामने आया ठगी का ये मामला 

मामला तब सामने आया जब बैंक अधिकारियों ने संदिग्ध बड़े ट्रांजेक्शन देखे और पूछताछ की. तब डॉक्टर नारायण को एहसास हुआ कि वे ठगी के शिकार हो चुके हैं. फिर मामला साइबर क्राइम ब्रांच में दर्ज कराया गया .

अब तक पुलिस जांच में क्या निकला

मामले की जानकारी आते ही साइबर  पुलिस जांच में लग गई है.वीडियो कॉल और अन्य रिकार्ड से पता चला है कि दो लोग इस कांड में शामिल थे.

सलाह: ऐसे फ्रॉड से कैसे बचें?
  • कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, पुलिस आदि) कभी फोन/वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती या अरेस्ट की धमकी नहीं देती.
  • संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत काटें और 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) या स्थानीय पुलिस को सूचित करें.
  • परिवार के सदस्यों को शामिल करें, अकेले कोई ट्रांसफर न करें.
  • बड़े अमाउंट के ट्रांसफर से पहले बैंक या पुलिस से वेरिफाई करें.