वाराणसी
उत्तर प्रदेश में सरकार के दावों के बावजूद कई इलाकों में डेंगू से हलात बिगड़ रहे हैं. वाराणसी में हालात ये हैं कि अस्पताल में भी मरीज मच्छरदानी के भीतर रहने के लिए विवश हैं. यहां लगभग हर बेड पर मरीज हैं, और सभी किसी किसी तरह के बुखार से पीड़ित है.बुखार के कारण मरीजों के प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं. प्लेटलेट्स को लेकर मरीजों में है भय का माहौल है . हालात इतने खराब है कि शहर में प्लेटलेट्स की आपूर्ति नहीं हो पा रही है.
वाराणसी के मंडलीय चिकित्सालय में मरीज मच्छरदानी में बैठे हैं. यहां के मरीज यह बता रहे हैं कि डेंगू ने किस तरह से उन्हें डंक मारा है.भले ही सरकारी अस्पताल के डॉक्टर डेंगू को बुखार की आड़ में छिपाने की कोशिश कर रहे है लेकिन मरीजों के हालात और शहर में प्लेटलेट्स के लिए हो रही मारामारी से साफ है कि शहर में डेंगू ने किस तरह से चिकित्सा व्यवस्था को ही मच्छरदानी के अंदर रहने के लिए मजबूर कर दिया है. डॉक्टरों से पूछने पर कि शहर में हालात किस तरह से है तो डेंगू का छोटा सा आंकड़ा बताकर उसके उपाय बताने लग रहे हैं.
भले ही सरकारी आंकड़ों में डेंगू के मरीज दहाई अंक में नहीं है लेकिन शहर के हालात पर नजर डालें तो सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू के पेशेंट्स भरे हुए हैं.
वाराणसी में पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षा अधिकारियों की बैठक बुलाकर डेंगू पर सतर्कता बरतने की हिदायत भी दे चुके हैं, इसके बावजूद चिकित्सा अधिकारी डेंगू की आंकड़ेबाजी का खेल खेल है. हालांकि शहर में डेंगू से बचाव के उपाय का प्रचार प्रसार किया जा रहा है लोगों से मछरदानी से बाहर नहीं निकलने की सलाह भी दी जा रही है लेकिन डेंगू है कि मानता नहीं. हर नये दिन मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है.