अयोध्या
अयोध्या के गुमनामी बाबा और नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक ही व्यक्ति-अनुज धर, लेखक रिसर्चर
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी की लड़ाई मे जो अतुलनीय योगदान दिया,आजाद भारत ने उस महान नेता के साथ उतना ही घोर अन्याय किया, ये बात किसी से छिपी नहीं है. आजाद हिंद फौज जैसी विशाल सेना का गठन और आजादी के लड़ाई में अंग्रेजी सेना पर करारा प्रहार करने वाले नेताजी को जिस आजाद भारत में सर्वोच्च स्थान मिलना चाहिये था,वो नेता जी एक किंवदंती मात्र बन कर रह गये. कभी हवाई जहाज दुर्घटना में मौत तो कभी गुमनामी बाबा के नाम पर उनकी पहचान स्थापित करने की कोशिश होती रही लेकिन किसी भी संभवाना को ठोस पहचान नहीं मिली. नेता जी सुभाष चंद्र बोस को लेकर एक बार फिर से एक मांग जोर पकड़ रही है.
अयोध्या में गुमनामी बाबा से संबंधित सामान को सार्वजनिक करने की मांग
लेखक और शोधकर्ता अनुज धर ने मांग की है कि गुमनामी बाबा उर्फ भगवान जी उर्फ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रहस्य पर से पर्दा उठाने केलिए अयोध्या में बने रामकथा संग्रहालय में रखे हुए गुमनामी बाबा से संबंधित सामानों को सार्वजनिक किया जाये ताकि जनता को पता चल सके कि उस समान में आखिर क्या है?
शोधकर्ता और लेखक अनुज धर का कहना है कि गुमनामी बाबा का सत्य सामने लाने में ईमानदारी नहीं बरती गई है. गुमनामी बाबा या भगवान जी ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे, यह सिद्ध हो चुका है लेकिन तत्कालीन सरकार ने गुमनामी बाबा से जुड़े साक्ष्यों को छुपाया. गुमनामी बाबा और नेताजी के संबंध में कितने आयोग बनाए गए सभी ने जांच रिपोर्ट बहुत छोटी लिखी है या सरकार के दबाव में रिपोर्ट बनाई है. यहां तक कि डीएनए रिपोर्ट भी मात्र 2 पन्नों में बना दी गई है और यह सिद्ध कर दिया गया है कि दोनों अलग हैं. डीएनए रिपोर्ट को नेगेटिव बताया गया है.
अमेरकी हैंड राइटिंग एक्सपर्ट की जांच में आया-“दोनों हैंडराइटिंग एक ही व्यक्ति के हैं”- अनुज धर,लेखक
लेखक अनुज धर ने दावा किया है कि “अमेरिका के प्रसिद्ध हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से हमने व्यक्तिगत बिना बताए हुए दोनों राइटिंग का टेस्ट कराया और उन्होंने बताया है कि ये दोनों हैंडराइटिंग एक ही व्यक्ति के हैं.”
रिसर्चर अनुज धर का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार के 6 साल पूरे होने वाले हैं लेकिन गुमनामी बाबा पर बनाई गई गैलरी की ओपनिंग आम जनता के लिए नहीं हुई. वर्तमान सरकार भी बाबा का सत्य सामने लाने में गंभीर नहीं है. दावा किया है कि जब गुमनामी बाबा की गैलरी खोली जाएगी तो आम जनता अपने आप समझ जाएगी कि ये सामान किसका था.

