Crude Oil Prices Hike नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा खाड़ी क्षेत्र में तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच Brent crude का भाव 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. गुरुवार को Brent crude करीब 4 फीसदी चढ़कर 105.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. वहीं अमेरिकी WTI crude भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया.
Crude Oil Prices Hike:अमेरिका-ईरान संघर्ष का तेल बाजार पर सीधा असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. हाल के दिनों में संघर्ष के साथ खाड़ी क्षेत्र में समुद्री जहाजों पर हमले बढ़े हैं. इससे निवेशकों और तेल कारोबारियों के बीच मध्य-पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में इस समय केवल वास्तविक सप्लाई को लेकर चिंता नहीं है, बल्कि भविष्य में सप्लाई बाधित होने का जोखिम भी तेल की कीमतों में शामिल हो रहा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ी चिंता
तेल बाजार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से दुनिया भर के तेल कारोबार पर असर पड़ने की आशंका रहती है.
हाल के दिनों में इस इलाके में टैंकरों और दूसरे जहाजों पर हमलों की खबरों ने चिंता बढ़ाई है. ईरान की ओर से भी होर्मुज के आसपास समुद्री यातायात पर और प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी गई है. ऐसे घटनाक्रमों से कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई को लेकर बाजार में जोखिम बढ़ गया है.
WTI भी 100 डॉलर के पार
Brent crude के साथ अमेरिका के West Texas Intermediate (WTI) में भी जबरदस्त तेजी देखी गई. गुरुवार को WTI करीब 4.15 फीसदी बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. मई के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत इस स्तर के ऊपर गई है.
कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर परिवहन, उत्पादन और ऊर्जा लागत बढ़ सकती है.
भारत पर भी पड़ सकता है असर
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है. इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों, परिवहन लागत और दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है. हालांकि घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर कई अन्य कारकों के साथ-साथ सरकारी नीतियों और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर भी निर्भर करता है.
आगे और महंगा हो सकता है तेल?
तेल बाजार में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री तनाव कितने समय तक जारी रहता है. यदि तेल की सप्लाई और समुद्री परिवहन लंबे समय तक प्रभावित होते हैं तो कीमतों पर और दबाव बन सकता है.
Reuters के मुताबिक, Brent crude अगस्त की शुरुआत के निचले स्तरों से अब 30 फीसदी से अधिक चढ़ चुका है. बाजार की आगे की दिशा चीन की कच्चे तेल की मांग और मध्य-पूर्व से सप्लाई की स्थिति पर भी निर्भर करेगी.
फिलहाल 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा Brent crude यह संकेत दे रहा है कि भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा जोखिम बन गया है.

