Karnataka Leadership Change : कर्नाटक की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. बेंगलुरु से लेकर नई दिल्ली तक चली लंबी सियासी रार अब अपने अंतिम अंजाम की ओर बढ़ती दिख रही है. कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच ‘ढाई-ढाई साल’ के फॉर्मूले को लेकर चल रहा सस्पेंस अब खत्म होने की कगार पर है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने इस सत्ता संघर्ष को सुलझाने के लिए एक नया ‘बिहार फॉर्मूला’ निकाला है.
Karnataka Leadership Change : क्या है कर्नाटक का ‘बिहार फॉर्मूला’?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं गर्म थीं. अब जो फॉर्मूला चर्चा में है, उसके अनुसार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद और विधानसभा से इस्तीफा दिलाकर राज्यसभा के रास्ते दिल्ली भेजा जा सकता है.
इस त्याग के बदले सिद्धारमैया के बेटे डॉक्टर यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में मंत्री पद का तोहफा दिया जा सकता है. ठीक इसी तरह का राजनीतिक समीकरण हाल ही में बिहार में देखने को मिला था, जहां नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार को कैबिनेट मंत्री बनाया गया और सत्ता की कमान सम्राट चौधरी के हाथों में आ गई.
शिवकुमार को ‘सम्राट’ जैसी कुर्सी, जारकीहोली संभालेंगे संगठन
इस नए समीकरण के तहत डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनने का लंबा इंतजार खत्म हो सकता है. हालांकि, ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत सीएम बनने के बाद शिवकुमार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (KPCC) का पद छोड़ना होगा. चर्चा है कि संगठन की यह कमान सिद्धारमैया के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेता सतीश जारकीहोली को सौंपी जा सकती है, ताकि दोनों गुटों में संतुलन बना रहे.
बिहार और कर्नाटक में क्या है फर्क? बिहार में यह बदलाव दो अलग-अलग गठबंधन सहयोगियों (JDU और BJP) के बीच हुआ था, जबकि कर्नाटक में यह पूरा मामला एक ही पार्टी (कांग्रेस) के दो कद्दावर नेताओं के बीच का है।
लेटेस्ट अपडेट: सिद्धारमैया ने बुलाई कैबिनेट मंत्रियों की ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’
बेंगलुरु से लाइव अपडेट: इस बीच कर्नाटक के सियासी गलियारों में हलचल अचानक बेहद तेज हो गई है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार सुबह अपनी सरकार के सभी कैबिनेट मंत्रियों को ‘ब्रेकफास्ट’ (नाश्ते) पर आमंत्रित किया है.
हालांकि, इस बैठक को लेकर सरकार या कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के आधिकारिक शेड्यूल में इस ब्रेकफास्ट मीटिंग का जिक्र होने से कयासों का बाजार गर्म है. माना जा रहा है कि सिद्धारमैया इस बैठक में मंत्रियों के सामने आलाकमान के प्रस्ताव को रख सकते हैं.
सिद्धारमैया के फैसले पर टिकीं नजरें
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में आलाकमान के साथ हुई बैठक में यह पूरा खाका तैयार किया गया है, लेकिन सीएम सिद्धारमैया ने अभी तक इस ‘बिहार फॉर्मूला’ पर अपनी अंतिम रजामंदी (हाँ या ना) नहीं दी है. अब देखना यह होगा कि गुरुवार को होने वाली मंत्रियों की बैठक के बाद कर्नाटक की राजनीति क्या नया मोड़ लेती है.

