Bihar Election 2nd Phase 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण की वोटिंग के बाद जहां महागठबंधन भीतर ही भीतर कुलांचे मांर रहा है, वहीं एनडीए की सांसे फूलती हुई नजर आ रही है. पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान के बाद अब दूसरे और अंतिम चरण में बाकी बचे 122 सीटों पर कल मतदान होने जा रहा है. मंगलवार 11 नवंबर तो होने वाले मतदान के लिए माना जा रहा है कि एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला होने जा रहा है. एनडीए ने अच्छा प्रदर्शन किया तो बीजेपी -जेडीयू के सरकार बच जायेगी, अगर गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन कर दिया को तेजस्वी की जोरदार वापसी तय है.
Bihar Election 2nd Phase 2025:मैदान में 1302 उम्मीदवार
आपको बता दें कि दूसरे और अंतिम फेज में कुल मिलकर 1302 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला होगा.इस चरण में 3 करोड़ 70 लाख 13 हज़ार 556 मतदाता हिस्सा लेंगे. इस चरण के मतदान के बाद ये तय हो जायेगा कि अगले पांच साल के लिए बिहार में कौन सत्ता पर आरुढ़ होने जा रहा है.
सीमांचल में महागठबंधन को मगध में एनडीए मजबूत
सीमांचल में जहां महागठबंधन मजबूत स्थित में माना जा रहा है,वहीं मगध-शाहाबाद रीजन में लोग एनडीए के पक्ष में नजर आते हैं. मुख्य पार्टियां महागठबंधन और एनडीए के अलावा सीमांचल में ओवैसी फैक्टर ने मुश्किलें बढ़ाई हैं, वहीं कई स्थानों पर प्रशांत किशोर के जनसुराज का अच्छा प्रभाव है. माना जा रहा है कि असदुद्दीन औवैसी की AIMIM और प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी कई स्थानों पर इन दोनो गठबंधनों का खेल बिगाड़ सकती है.बिहार विधानसभा का परिणाम बहुत कुछ इस 122 सीटों पर होने वाले मतदान पर ही निर्भर होगा.
सीमांचल में ओवैसी फैक्टर ने बढ़ाई महागठबंधन की बेचैनी
सीमांचल में 24 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें कटिहार, किशनगंज, अररिया और पूर्णिया जैसे इलाके में मुस्लिम जनसंख्या अधिक है. ये इलाके हमेशा से मुस्लिम बहुल रहे हैं और राजद-कांग्रेस के परंपरागत वोटवैंक माने जाते हैं लेकिन इस बार असदुद्दीन ओवैसी महागठबंधन से अलग हैं. ओवैसी ने महागठबंधन में शामिल होने की बहुत कोशिश की लेकिन राजद ने उन्हे साथ नहीं लिया. ऐसे में अब ओवैसी महागठबंधन की सीटें काटने में लगे हुए हैं. आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2020 के चुनाव में सीमांचल की 24 सीटों में से महागठबंधन को 17 सीटें मिली थी, जिसमें अकेले ओवैसी ने 5 सीटों जीती थीं. पिछले चुनाव में एनडीए को यहां केवल 6 सीटें मिली थी.
इस बार ओवैसी महागठबंधन से अलग अपना चुनाव अकेले लड़ रहे हैं. इसलिए यहां राजद और कांग्रेस की मुश्किलें बढी हुई हैं . पिछले कुछ समय में सीमांचल के इलाके में बेरोजगारी और गरीबी से जूझ रहे युवाओं के बीच असदुद्दीन औवैसी ने अच्छी पैठ बनाई है. ऐसे में तेजस्वी यादव की कोशिश है कि युवाओं में औवैसी के प्रभाव को कम करते हुए मुस्लिम-दलित-ओबीसी वोटों को एकजुट रखा जाए.
शाहाबाद-मगध में जातीय गुणा-गणित
2020 के विधानसभा चुनाव में शाहाबाद-मगध क्षेत्र में कुल मिलाकर 46 सीटें महागठबंधन के पास थीं, वहीं एनडीए के खाते में 23 सीटें ही आई थी. इस बार इस क्षेत्र में जातीय समीकऱण को साधन के लिए चुनाव से पहले ही बीजेपी ने यहां के कुशवाहा नेता उपेंद्र कुशवाहा और राजपूत जाति से आने वाले भोजपुरी स्टार पवन सिंह को मिलवाकर सब कुछ ठीक होने का संदेश दिया था. इस इलाके में यानी औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, आरा, बक्सर, सासाराम और गया जैसे जिलों में यादव, कुर्मी, राजपूत, दलित और भूमिहार जातियों का समीकरण बड़ा फैक्टर बनकर उभरा है.
मंगलवार को कहां कहां पड़ेंगे वोट
बिहार विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में 20 जिलों के 122 सीटों पर मतदान होने जा रहा है. इन बीस जिलों में गयाजी की 10 सीट , कैमूर की 4 सीट , रोहतास की 7, औरंगाबाद की 6 सीट, अरवल की 2 सीट, जहानाबाद की 3 सीट, नवादा की 5 सीट, भागलपुर की 7 सीट, बांका की 5 सीट, जमुई की 4 सीट, सीतामढ़ी की 8 सीट, शिवहर की 1 सीट, मधुबनी की 10 सीट, सुपौल की 5 सीट, पूर्णिया की 7 सीट, अररिया की 6 सीट, कटिहार की 7 सीट, किशनगंज की 4 सीट, पूर्वी चंपारण की 12 सीट और पश्चिमी चंपारण की 9 सीटे शामिल हैं.

