Bangladesh violence : पडोसी देश बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीन के खिलाफ युवाओं का गुस्सा चरम पर हैं और एक बाऱ फिर से लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के लिए निकल प़ड़े हैं. पुलिस ने हजारों की संख्या में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों को नियंत्रण में करने के लिए स्टेन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया और आंसू गैंस के गोले छोड़े. पूरे देश में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है.
Bangladesh violence पर भारत सरकार ने जारी की एडवायरी
बांगलादेश में जारी हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को फिलहाल बंग्लादेश की यात्रा ना करने की सलाह ही है. साथ ही बंगलादेश में रह रहे भारतीय नागरिकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और अपने मूवमेंट को कम से कम रखने की सलाह दी है. भारत सरकार ने अपने नागरिकों को लगातार हाइकमिशन के साथ संपर्क रखने की सलाह दी है.

बांग्लाादेश में पिछले महीने से जारी है विरोध प्रदर्शन
बांग्लादेश में पिछले महीने से विरोध प्रदेर्शन चल रहा है लेकिन सरकार ने पहली बार हिंसा और विरोध को दबाने के लिए पूरे देश में कर्फ्यू लगाने का कदम उठाया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार को एक बार फिर से भड़की हिंसा में 93 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. प्रदर्शनकारी छात्र, पुलिस और सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं की बीच सड़क पर खूनी भिडंत हुई और लोग आगजनी और तोड़ फोड़ करते नजर आये. ये छात्र संगठन प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. हजारों प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और स्टेन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. सरकार ने रविवार शाम 6 बजे से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की, पिछले महीने शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पहली बार सरकार ने ये कदम उठाया है.
सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली खत्म करने की मांग को लेकर विरोध
आपको बता दें कि कि बंग्लादेश में पिछले महीने से सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली को खत्म करने की मांग को लेकर युवा शेख हसीना सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. मामूली विरोध से शुरु हुआ ये प्रदर्शन अब खूनी रुप ले चुका है और पूरे देश में अब तक इसके कारण हुई हिंसा में 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. सबसे ज्यादा और हिंसक प्रदर्शन राजधानी ढाका में देखने के लिए मिला है.
सरकार के किस आरक्षण नियम से परेशान है युवा ?
बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने 1971 के बांग्लदेश स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार के लिए सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली लागू करके 30 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है. इस फैसले को लेकर पूरे देश में पिछले महीने से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. हलांकि लोगों के बढ़ते विरोध को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 30 प्रतिशत आरक्षण को घटा कर 25 प्रतिशत कर दिया, इसमें से 3 प्रतिशत स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को दिया गया, फिर भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा. अब प्रदर्शनकारी अपने खिलाफ सरकार द्वारा किये गये बल प्रयोग को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं.
छात्रों के मिला विपक्षी नेशनलिस्ट पार्टी का समर्थन
छात्रों के नाम पर हो रहे विरोध प्रदर्शन में बंग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी नेशनलिस्ट पार्टी छात्रों के समूह का समर्थन कर रही है और उन्हें मदद भी कर रही है. छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन में नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल है. ये छात्र संगठन लोगों से सरकार के विभागों के बिल और टैक्स ना भरने का अपील कर रहे हैं. साथ ही साथ लोगों से अपील कर रहे हैं कि वो रविवार को काम पर ना जाये.प्रदर्शनकारियों ने रविवार को उन प्रतिष्ठानों पर और कार्यालयों पर हमले किये जो रविवार के दिन खुले थे. इनमें राजधानी ढाका का शेख मुजीब मेडिकल अस्पताल यूनिर्सिटी भी शामिल है. समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों ने कच्चे बम और गोलियों की आवाजें सुनने का भी दावा किया है.
बांग्लादेश में पिछले महीने से जारी है हिंसक विरोध प्रदर्शन
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक पूरा ढाका शहर युद्ध के मैदान में बदल गया है, प्रदर्शनकारियों ने कई गाडियों में आग लगा दी. मुशीगंज में विरोध करने वाले नेताओं को ये कहते सुना गया है कि आंदोलनकारी कुद को बांस की लाठियों से लैश कर लें, क्योंकि जुलाई के महीने में हुए विरोध प्रदर्शन को पुलिस ने बल प्रयोग करते कुचल दिया था. बांग्लादेश की लोकल मीडिया के मुताबिक मगुरा, बोगुरा, सिराजगंज और रंगपुर समेत 11 जिलों में अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सदस्य सीधे एक दूसरे से भिड़ गये और हिंसा में कई लोगों की जान चली गई.
जो प्रदर्शन कर रहे है वो छात्र नहीं आतंकी हैं- शेख हसीना सरकार
देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शन से आ रहे दवाब को सरकार खारिज करने की कोशिश करती नजर आ रही है. शेख हसीना सरकार ने इस हिंसा में विपक्षी दलों और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी पार्टी और उनकी स्टूडेटं विंग को दोषी ठहराया है. बांगलादेश सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आरोप लगाया कि जो लोग सड़क पर हिंसा कर रहे है वो छात्र नहीं बल्कि आतंकवादी संगठन के लोग हैं, जो देश में अस्थिर करना चाहते हैं. पीएम शेख हसीना ने लोगों से इन आतंकियो से सख्ती से निबटने की अपील की है .

