Noida Engineer Death : ग्रेटर नोएडा के 27 साल के सॉफ्टेवयर इंजीनियर की प्रशासनिक लापरवाही के कारण डूबने से हुई मौत के मामले में सीएम योगी ने तगड़ा एक्शन लिया है. इस पूरे मामले को सीएम योगी ने गंभीरता से लिया है और नोयडा प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई की है.सीएम को निर्देश पर पूरे मामले की गहन जांच के लिए 3 सदस्यीय SIT का गठन किया गया है.
Noida Engineer Death :जांच के लिए बनाई गई एसआईटी
सीएम योगी ने इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है,जिसका नेतृत्व मेरठ जोन के एडीजी करेंगे. टीम में मेरठ मंडल के डिविजनल कमिश्नर को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रशासनिक और तकनीकी दोनों पहलुओं की बारीकी से जांच हो सके.इस कमिटी में पीडब्लूडी के इंजीनियर को भी शामिल किया गया है ताकि घटना में यदि किसी तरह की निर्माण मे खामी या लापरवाही की बात सामने आती है, तो उसकी विशेषज्ञ स्तर पर जांच हो सके.
कैसे हुई इंजीनियर युवराज की मौत ?
आपको बता दें कि 16-17 जनवरी की रात को ग्रेटर नोयडा के सेक्टर 150 में घने कोहरे के कारण 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार अनियंत्रित होकर एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में गिर गई. बेसमेंट में खुदाई के बाद पानी भरा हुआ था. बेसमेंट करीब करीब 20 से 40 फीट गहरा था. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गडढे में कार गिरने के बाद युवराज ने करीब 1 से लेकर 2 घंटे तक मदद के लिए गुहार लगाई, रेस्क्यूटीम भी आई लेकिन घने कोहरे की बात कहकर और गडढे में सरिया आदि के होने की बात कहकर बचाव टीम पानी में उतरने से टाल मटोल करती रही. बचाव कार्य में देरी के कारण युवराज का दम घुट गया और और कार्डियक अरेस्ट से उसकी मौत हो गई. पोस्टमार्टम में युवराज के फेफड़ों से करीब 3.5 लीटर पानी निकला.
बचाव दल की लापरवाही ने ली युवक की मौत !
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बचाव दल के लापरवाही के कारण लोगों की आंखों के समाने एक युवक की मौत हो गई, और कोई उसे बचा नही सका. स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने गड्ढे के सामने ना कोई बैरिकेडिंग की, ना चेतावनी दी, ना कोई साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर या लाइटिंग लगाई थी. नोयडा में पहले भी ऐसे हादसे हो चुके थे, इसके बावजूद नोएडा अथॉरिटी ने कोई एक्शन नहीं लिया है. रेस्क्यू टीम पर आरोप लगे कि ठंडे पानी और सरियों के डर से वे युवराज को बचाने नहीं उतरे .

