अमित शाह ने इस वादे को केवल चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि एक ठोस योजना बताया. उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्री होने के नाते वे खुद इस योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी लेंगे. इसके साथ ही उन्होंने यह भी ऐलान किया कि असम के हर जिले में बड़े स्तर पर डेयरी यूनिट स्थापित किए जाएंगे, जिससे राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और आदिवासी समुदाय को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा.
‘दूधनोई का नाम करेंगे साकार’
अपने संबोधन के दौरान शाह ने दुधनोई के नाम को “दूध की नदी” से जोड़ते हुए कहा कि बीजेपी इस कल्पना को हकीकत में बदलने का काम करेगी. उन्होंने राज्य में विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का भी जिक्र किया और Narendra Modi तथा Himanta Biswa Sarma द्वारा आदिवासी कल्याण के लिए तैयार किए गए रोडमैप को भी सामने रखा.
अमित शाह ने अपने भाषण में तीन प्रमुख मुद्दों पर जोर दिया…
पहला, आदिवासी कल्याण, जिसके तहत डेयरी योजना और अन्य विकास कार्यक्रमों का जिक्र किया गया.
दूसरा, घुसपैठ का मुद्दा, जिस पर उन्होंने कहा कि पहचान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बीजेपी को एक और कार्यकाल मिलने पर सभी घुसपैठियों को वापस भेजा जाएगा.
तीसरा, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), जिसे असम में लागू करने की बात कही गई, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया कि इसे आदिवासी क्षेत्रों पर लागू नहीं किया जाएगा ताकि उनकी परंपराएं सुरक्षित रहें.
हालांकि इस ऐलान के बाद सियासी बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों और सोशल मीडिया के एक वर्ग ने इस वादे को चुनावी जुमला बताते हुए सवाल उठाए हैं कि मौजूदा सरकार ने अब तक इस दिशा में कदम क्यों नहीं उठाए. असम में इससे पहले भी बीजेपी की ही सरकार थी, फिर भी ये का मपहले क्यों नहीं किया गया. सोसळ माीडिया पर इस योजना को लेकर खूब बातें हो रही हैं. कुछ लोगों इसे व्यंग्यात्मक अंदाज में “वोट दो, गाय-भैंस लो” योजना तक कह रहे हैं.