Bangladesh Mayawati:बंग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और हिंसा को लेकर यूपी सीएम योगी अदित्यानाथ ने विधानसभा में सभी दलों से आह्वान किया कि सभी लोग एक जुट होकर उसी तरह से बंग्लादेश में हो रहे हमले का विरोध करें जिस तरह से गाजा पर फिलिस्तीन के किये गये हमले को लेकर हुए थे.
योगी आदित्यनाथ के आह्वान पर बीएसपी की सुप्रीमो मायावती का बयान आया है.मायावती ने बंग्लादेश में हिंदुओं के उपर किये जा रहे अत्याचार को लेकर चिंता जताई है. बीएसपी सुप्रीमो ने सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा लेख लिखा है,जिसमें दीपू दास नाम के एक युवक की नृशंश हत्या पर चिंता जाहिर किया है.
बीएसपी सुप्रीमो मायावती का ट्वीट
जैसाकि सर्वविदित है कि अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब को जिस प्रकार से साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है उससे अपने देश में ही नहीं बल्कि अन्यत्र भी चिन्ता की लहर है तथा अभी हाल ही में वहाँ एक दलित युवक की जिस…
— Mayawati (@Mayawati) December 25, 2025
Bangladesh Mayawati ने जताई चिंता
उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को सीएम योगी ने विपक्षी समाजवादी पार्टी को बंग्लादेश में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए ललकारा. सीएम योगी ने कहा कि बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की लिंचिंग कर दी गई लेकिन विपक्ष कुछ बोल नहीं रहा है. यहां तक की गाजा में मुसलमानों के साथ अत्याचार होता है, तो विपक्ष मुखर होकर इसका विरोध करता है. सीएम योगी ने कहा कि याद रखिए कि जो लोग अभी बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर मुंह बंद करके बैठे हैं, उनको कल उस समय कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं होगा जब उत्तर प्रदेश से सरकार बंग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को निकाल कर बाहर करेगी. सीएम योगी के बयान के समाजवादी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन बीएसपी प्रमुख मायावती ने एक्स पर एक पोस्ट लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है. मायावती ने अपने इस ट्वीट में अपनी चिंता केवल दलितों और पिछड़ों के प्रति नहीं रखी है बल्कि समस्त हिंदु समुदाय की बात की है.
मायावती ने लिखा है
“जैसाकि सर्वविदित है कि अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब को जिस प्रकार से साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है उससे अपने देश में ही नहीं बल्कि अन्यत्र भी चिन्ता की लहर है तथा अभी हाल ही में वहाँ एक दलित युवक की जिस प्रकार से नृशंस हत्या की गयी है उसको लेकर भारत भर में लोगों का सड़कों पर फूटा आक्रोश स्वाभाविक है, जिसका भारत सरकार को तुरन्त समुचित संज्ञान लेकर आगे हर स्तर पर कुछ और भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की देश को आशा है और यही समय की माँग भी लगती है। वैसे तो अपने देश में भी ख़ासकर दलितों व आदिवासियों आदि पर सदियों से होने वाली जातिवादी द्वेष, जुल्म-ज़्यादती, शोषण व तिरस्कार आदि रुका नहीं है बल्कि हर स्तर पर लगातार जारी है तथा उनकी सुरक्षा को लेकर बने क़ानूनों को एक प्रकार से निष्क्रिय ही बना दिया गया है, किन्तु पड़ोसी देश बांग्लादेश में इसी प्रकार की होने वाली जुल्म-ज्यादती कोई कम गंभीर बात नहीं है बल्कि यह अति-दुखद व चिन्ता की बात है। साथ ही, पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति को लेकर ख़ासकर देश में लोगों की चिन्तायें लगातार बनी रहती हैं और इस मामले में सरकार अपनी भूमिका भी निभाने का प्रयास करती रहती है, किन्तु हाल के दिनों में बांग्लादेश में जिस प्रकार से भारत व हिन्दू विरोधी घटनायें घटित हो रही हैं उसको लेकर केन्द्र सरकार को लोगों की अपेक्षा के अनुसार और भी अधिक सक्रियता एवं प्रभावी क़दम उठाने की ज़रूरत लग रही है जिसको लेकर जनता का समर्थन अवश्य ही सरकार के साथ होगा। सरकार उचित ध्यान दे।”
बांग्लादेश मुद्दे पर विपक्ष की तटस्थता, क्या एक रणनीति है
बीजेपी का आरोप है कि बंग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर भारत का विपक्ष चुप्पी साधे हुए है और इसका बड़ा कारण वोट वैंक की राजनीति है. विपक्ष इस बात से डर रहा है कि कहीं वोट बैंक नाराज ना हो जाये. कांग्रेस की तरफ से भी अब अब तक बंग्लादेश हिंसा को लेकर कोई बड़ा बयान नहीं आया है. वहीं समाजवादी पार्टी ने इसे भाजपा के द्वारा मुद्दों को दूसरी तरफ घुमाने का आरोप लगाया. समाजवादी पार्टी ने बंग्लादेश मे हो रही हिंसा को भारत-बांग्लादेश संबंधों का रणनीतिक मामला करार दिया था.
माना जा रहा है कि विपक्षी दल अपने वोट बैंक की नाराजगी से बचने के लिए तटस्थ रुख अपना रहा है, क्योंकि इस मुद्दे पर बोलने से हिंदुत्व की राजनीति को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आखिरकार बीजेपी को ही फायदा पहुंचेगा.उत्तर प्रदेश में ये तटस्थता ज्यादा स्पष्ट है,क्योंकि यहां करीब 19% मुस्लिम वोटर हैं.
विपक्ष में रहते हुए मायावती का बयान महत्वपूर्ण
मायावती ने क्यों उठाया यह मुद्दा
बीते दिनों में बीएसपी प्रमुख मायावती ने ऐसे कई बयान दिये है जो बंग्लादेश में हिंदुओं के पक्ष में रहे हैं.मायावती ने पीडि़त हिंदुओं के प्रति जो आवाज उठायी है वो सहज मानवीयता भी है लेकिन 25 दिसंबर को एक्स पर मायावती ने जो लंबा पोस्ट लिखा है, उससे ऐसा लग रहा है जैसे उन्होने बीजेपी की ही बात को दोहराया है. जानकार मान रहे है कि ये मावावती की एक सोची समझी राजनीतिक चाल है ताकि वो आने वाले चुनाव में अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत कर सकें. लोगों का मानना है कि मायावती ने बहुत सोच समझ कर ही ये बयान दिया होगा.
इससे पहले भी मायावती अपने सोशल मीडिया पोस्ट में समाजवादी पार्टी और कांग्रस को निशाने पर ले चुकी हैं. उन्होने पिछले साल एक पोस्ट में लिखा था कि”बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों, खासकर दलितों, पर अत्याचार हो रहे हैं और कांग्रेस-SP जैसे विपक्षी दल इस पर चुप हैं क्योंकि वे मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि सिर्फ कांग्रेस और सपा के नेताओं को सिर्फ संभल की फिक्र रहती है.”
उत्तर प्रदेश में फिर से बनेगी मायावती की बात
जानकारों का मानना है कि मायावती का ये स्टैंड उन्हें नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही पहुंचा रहा है. प्रदेश में रहने वाले दलितों में एक बड़ा वर्ग हिंदुओं का है, जिसे बंग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से फर्क पड़ता है. ऐसे में बंग्लादेश के हिंदुओं के लिए आवाय उठाना यहां के हिंदु दलितो के लिए भी भावात्मक है और इससे मायावती की जमीन मजबूत हो सकती है. खासकर पूर्वांचल में जहां बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा गर्म है, वहां समाजवादी पार्टी और-कांग्रेस पर हमला करके मायावती यहां बीएसपी को असली दलित पार्टी के रूप में एक बार फिर से स्थापति कर रही हैं. BSP से मुस्लिम वोट पहले ही दूर हो चुके हैं, इसलिए मायावती को नुकसान कम फायदा अधिक दिख रहा है.

