Sunday, July 5, 2026
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नोएडा पुलिस पर कार्रवाई,जमीन विवाद मामले में मुख्यमंत्री के आदेश पर दो अधिकारी नपे

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Action on Noida Police
Action on Noida Police,AI-generated

Action on Noida Police नोएडा : गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने शनिवार देर रात कानून व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस कमिश्नर ने सेक्टर 113 के थाना प्रभारी (SHO) विपिन कुमार यादव और क्राइम ब्रांच के निरीक्षक यतेंद्र यादव को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है. माना जा रहा है कि यह कदम एक जमीन विवाद की शिकायत सीधे लखनऊ मुख्यालय पहुंचने के बाद उठाया गया है.

Action on Noida Police:भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के जरिए CM तक पहुंची शिकायत

सूत्रों के अनुसार, नोएडा में जमीन से जुड़े एक गंभीर मामले में स्थानीय पुलिस पर लापरवाही और पक्षपात के आरोप लगे थे. इस मामले की शिकायत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से की गई थी. जब यह मामला उनके माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, तो शासन स्तर पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई.

मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान लेने के बाद पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मामले की त्वरित जांच कराई और प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिरी.

सेक्टर 113 थाना प्रभारी लाइन हाजिर, जांच शुरू

कार्रवाई के तहत सेक्टर 113 के थाना प्रभारी विपिन कुमार यादव को हटाकर अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) भेज दिया गया है. विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह “जनहित” में की गई कार्रवाई है, लेकिन अंदरूनी तौर पर इसे अनुशासनहीनता और लापरवाही से जोड़कर देखा जा रहा है. फिलहाल पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है और संभावना जताई जा रही है कि कुछ अन्य पुलिसकर्मी भी इस लपेटे में आ सकते हैं.

श्रमिक हिंसा मामले में भी गिली गाज

जमीन विवाद के अलावा, पुलिस कमिश्नर ने फेज-2 थाना क्षेत्र में हुई श्रमिक हिंसा के मामले में भी सख्त रुख अपनाया है. एनएसईजेड (NSEZ) चौकी प्रभारी धीरेंद्र मलिक और पैरोकार सनी पर भी कार्रवाई की गई है. पुलिस विभाग में एक साथ हुई इन कार्रवाइयों से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.

अधिकारियों ने साधी चुप्पी

इस पूरी बड़ी कार्रवाई को लेकर नोएडा कमिश्नरेट के आला अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे प्रशासनिक फेरबदल बताया जा रहा है, लेकिन सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत यह एक्शन लिया गया है.