India Oman Gas Pipeline Project : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. ओमान और गुजरात के बीच प्रस्तावित लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी डीप-सी गैस पाइपलाइन परियोजना को नई गति मिली है. यह परियोजना भविष्य में भारत को प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚’𝐬 𝐛𝐨𝐥𝐝 𝐬𝐭𝐫𝐢𝐤𝐞 𝐟𝐨𝐫 𝐞𝐧𝐞𝐫𝐠𝐲 𝐈𝐧𝐝𝐞𝐩𝐞𝐧𝐝𝐞𝐧𝐜𝐞!
While the world watches the Strait of Hormuz nervously, India is quietly building a game-changing solution: the Oman-Gujarat Deep-Sea Gas Pipeline.
A massive 2,000 km underwater artery at… pic.twitter.com/RGMXFe8DDk
— BJP (@BJP4India) June 8, 2026
India Oman Gas Pipeline Project : 30 साल पुरानी योजना को मिला नया जीवन
भारत और ओमान को सीधे जोड़ने वाली इस पाइपलाइन योजना पर पिछले तीन दशकों से चर्चा चल रही है. हालांकि, भारी लागत, तकनीकी चुनौतियों और व्यावसायिक व्यवहार्यता से जुड़ी समस्याओं के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी थी.
अब इस परियोजना को समर्थन देने वाले निजी समूह SAGE ने समुद्र तल सर्वेक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय अध्ययन पूरा कर लिया है. इसके बाद परियोजना को फिर से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हो गई है.
40 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन परियोजना पर करीब 40,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री गैस पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक हो सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत और खाड़ी देशों के बीच एक स्थायी ऊर्जा गलियारा तैयार करेगी, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थिर हो सकेगी.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता होगी कम
वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. तेल और एलएनजी (LNG) की अधिकांश आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचती है.
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. यहां किसी भी तरह का तनाव, संघर्ष या अवरोध वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है. इससे तेल और गैस की कीमतों में उछाल, शिपिंग लागत में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आ सकती है.
नई पाइपलाइन बनने के बाद भारत को गैस की आपूर्ति के लिए एक वैकल्पिक और अधिक सुरक्षित मार्ग मिल जाएगा.
समुद्र की 3000 मीटर गहराई से गुजरेगी पाइपलाइन
इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती इसकी गहराई है. प्रस्तावित पाइपलाइन का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक गहराई में बिछाया जाएगा.
यह गहराई सामान्य अपतटीय (Offshore) ऊर्जा परियोजनाओं की तुलना में कहीं अधिक है. ऐसे में परियोजना को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक इंजीनियरिंग और विशेष तकनीक की आवश्यकता होगी.
गैस परिवहन की लागत कितनी होगी?
परियोजना प्रस्तावों के अनुसार, इस पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस के परिवहन की लागत लगभग 2 से 2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (MMBTU) हो सकती है.
हालांकि अंतिम लागत परियोजना की फंडिंग व्यवस्था, निर्माण खर्च और भविष्य में गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर करेगी.
भारत और ओमान दोनों को होगा फायदा
इस परियोजना से भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने का अवसर मिलेगा. वहीं ओमान को प्राकृतिक गैस के लिए एक स्थायी और बड़ा निर्यात बाजार प्राप्त होगा.
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक पूरी होती है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है और भविष्य में पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति के नए रास्ते खोल सकती है.
इस प्रोजेक्ट की सफलता से किस-किस चीज पर पड़ेगा असर ?
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम होगी.
- प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अधिक सुरक्षित होगी.
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी.
- खाड़ी क्षेत्र में तनाव का असर कम पड़ेगा.
- भारत और ओमान के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी.
- दीर्घकाल में गैस आपूर्ति की लागत नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है.
भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वतंत्रता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

