Monday, June 17, 2024

बिहार में नीतीश कुमार के लिए मुश्किल बनती जा रही बीजेपी, चिराग और जीतनराम मांझी भी जा सकते हैं बीजेपी के साथ

बिहार में एक वक्त में नीतीश कुमार के साथ विधानसभा चुनाव में प्रदेश के विकास का खाका खींचने का काम करने वाली बीजेपी आज उन्हीं नीतीश कुमार को बिहार की सत्ता से बेदखल करने की कोशिश में लगी हुई है. बीजेपी अगले साल यानी 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किसी भी तरीके से बिहार की 40 सीटों में से ज्यादा से ज्यादा सीटों पर कमल खिलाने के लिए आतुर दिख रहीं है लेकिन बीजेपी की इस सपने के साकार होने की राह में सबसे बडा रोड़ा कोई और नहीं बल्कि उसके पुराने वफादार साथी व बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनते दिख रहें हैं. दरअसल किसी जमाने में मगध जैसे विशाल साम्राज्य के रूप में स्थापित होने वाला बिहार मौजूदा समय में जातिवाद की राजनीति के इर्द गिर्द ही घूमता हुआ नजर आता है. बिहार की जातिवाद की ही राजनीति का असर है कि बिहार में बीजेपी को सत्ता से बाहर होना पड़ा है. जबकि वहीं 15 वर्षो तक बिहार में राज कर चुके लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी नीतीश कुमार के साथ मिलकर फिर से सत्ता तक पहुंच गए. ऐसे में अब यदि बिहार में बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतनी है तो उसे किसी भी तरीके से नीतीश और तेजस्वी यादव के ओबीसी कार्ड के अलावा उनको कमजोर करना पड़ेगा.

नीतीश-तेजस्वी के तल्ख संबंधों का बीजेपी को मिलेगा फायदा

बिहार में एक बार फिर से राजनीतिक सियासत व दांव पेंच का खेल शुरू हो गया है. इस बार फिर सबकी निगाहें बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के प्रमुख नीतीश कुमार पर टिकी हुई है. दरअसल हाल ही में बीजेपी का साथ छोड़कर आरजेडी के साथ मिलकर नई सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार के संबंध अब आरजेडी के नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से फिर से तल्ख हो गए हैं. ऐसे में एक बार फिर से अटकलों और कयासों का दौर शुरू हो गया है कि क्या नीतीश बाबू बीजेपी के साथ मिलकर फिर नई सरकार बना सकते हैं.
बीते दिनों बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने रामचरितमानस के संबंध में एक विवादित टिपण्णी कर दी थी. जिसके बाद उनके उपर बीजेपी के अलावा खुद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमलावर हो गए और उन्होंने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव से अपना बयान वापस लेने तक की बात कह डाली. इसके अलावा नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के कई नेताओं ने भी बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव से अपना बयान वापस लेने के लिए कहा लेकिन वहीं दूसरी ओर नीतीश सरकार के सहयोगी दल आरजेडी के नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपनी पार्टी के विधायक व शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव के साथ पूरी मजबूती से खड़े दिखे थे. तेजस्वी यादव ने अपनी सरकार के शिक्षा मंत्री के बचाव में कहा कि संविधान में सभी नागरिकों को अपनी बात कहने का अधिकार है.

चिराग पासवान को साथ लेकर नीतीश के दांव को फेल कर सकती है बीजेपी

लोक जनशक्ति पार्टी(रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान की बिहार में मजबूत पकड़ है. दरअसल बीजेपी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के विकल्प के रूप अन्य दलित नेताओं को आगे करके उनकी रणनीति को फेल कर सकती है. ऐसे में चिराग पासवान की भी छवि बिहार में एक बड़े दलित नेता के पुत्र और युवा दलित नेता के रूप में उभरकर सामने आई है. ऐसे में यदि चिराग पासवान भाजपा के साथ भविष्य में लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो बिहार में दलित वोट बैंक का झुकाव निश्चित रूप से भाजपा की तरफ ज्यादा होगा. इसके अलावा बिहार में हिंदुस्तान अवाम पार्टी, हम के संस्थापक व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी बीजेपी के एनडीए का हिस्सा होकर अगला लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं. ऐसे में बीजेपी बिहार में नीतीश और तेजस्वी के पास से दलित वाटरों को अपने पक्ष में लाने के लिए चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के साथ का लाभ उठा सकती है. दरअसल जीतनराम मांझी और चिराग पासवान मौजूदा समय में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के गठबंधन वाली सरकार के धुर विरोधी हैं. ऐसे में ये दोनों नेता अपनी-अपनी पार्टी का एनडीए के साथ गठबंधन करके लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं जिसका सबसे ज्यादा फायदा इन दोनों पार्टियों के साथ-साथ बीजेपी को अगले वर्ष होने वाले लोकसभा के चुनावों में मिल सकता है.

उपेन्द्र कुशवाहा के बीजेपी में शामिल होने के कयास

बिहार में कुशवाहा समाज के बड़े नेताओं में शुमार, पूर्व लोकसभा व राज्य सभा के सांसद व मौजूदा समय में बिहार विधान परिषद के सदस्य उपेन्द्र कुशवाहा भी मौजूदा समय में नीतीश कुमार की राजनीति और विचारधारा से असहमत दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि क्या उपेन्द्र कुशवाहा फिर से भाजपा में आ सकते हैं. उपेन्द्र कुशवाहा यदि भाजपा में आते हैं तो बिहार में बीजेपी को पिछड़ा समुदाय का एक बड़ा नेता मिल जाएगा जिसका लाभ बीजेपी को पिछड़ा समाज के वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए मिलेगा. हालांकि अभी वर्तमान में बिहार में बीजेपी के पास पिछड़ा समुदाय से आने वाला कोई बड़ा नेता नहीं है जिसकी वजह से बिहार में बीजेपी पिछड़ा समुदाय में अपनी पैठ नहीं बना पा रही है लेकिन आने वाले समय में उपेन्द्र कुशवाहा अगर बीजेपी में शामिल होते हैं तो बिहार में भाजपा नीतीश और तेजस्वी के पिछड़ा वोट बैंक में भारी सेंध लगाने में सफल हो सकती है. हालांकि अभी उपेन्द्र कुशवाहा ने बीजेपी में आने की बात पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है लेकिन फिर भी उपेन्द्र कुशवाहा के बीजेपी में दोबारा शामिल होने से बीजेपी को लाभ मिल सकता है जबकि आरजेडी और जेडीयू को अपने पिछड़ा वोट बैंक में बीजेपी के सेंध लगाने से नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बिहार में नीतीश सरकार पर फिर से गहराता संकट

बिहार की राजनीति में कपड़ों की तरह अपने राजनीतिक गठबंधन और सहयोगियों को बदलने के लिए पहचाने जाने वाले मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक बार फिर से राजनीतिक संकट गहराता हुआ नजर आ रहा है. दरअसल नीतीश कुमार ने जिस वैचारिक मतभेद के चलते भाजपा सरकार से अपना नाता तोड़कर तेजस्वी की आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. अब एक बार फिर से उसी तरह की परिस्थितियां नीतीश कुमार के साथ बनती हुई नजर आ रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि तेजस्वी यादव के साथ आगे भविष्य में नीतीश कुमार के वैचारिक मतभेद ज्यादा बढ़ते हैं तो क्या होगा. क्या नीतीश कुमार का तेजस्वी यादव की पार्टी के साथ गठबंधन और उनकी मौजूदा सरकार 2025 तक का अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी। लेकिन 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के एक वर्ष पहले 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं जिसमें बीजेपी और कांग्रेस के अलावा नीतीश कुमार की जेडीयू और तेजस्वी यादव की आरजेडी भी मुख्य रूप से शामिल होगी. ऐसे में बीजेपी की यही कोशिश होगी कि लोकसभा चुनाव से पहले किसी तरह से बिहार में अपनी सरकार बना ली जाए. दरअसल यदि नीतीश और तेजस्वी में मतभेद ज्यादा बढ़ते हैं तो बीजेपी को नीतीश सरकार को बिहार में घेरने का मौका मिल सकता है. हालांकि अभी फिलहाल यह देखने वाली बात होगी की नीतीश कुमार का अगला कदम क्या होता है.

नीतीश कुमार के बीजेपी में लौटने के भी कयास

बिहार की राजनीति में जो मौजूदा राजनीतिक परिदृष्य चल रहा है उसको देखकर कुछ राजनीतिक विश्लेषक भविष्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाजपा में शामिल होने के भी कयास लगा रहे हैं. दरअसल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पिछला इतिहास रहा है राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन का उसे देखकर इस संभावना से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है कि, आने वाले समय में नीतीश कुमार बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बना सकते हैं. हालांकि बिहार में क्या परिस्थितियां बनती हैं, कौन किसके साथ सरकार बनाता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन एक बात जो अभी से बिल्कुल स्पष्ट है वह यह कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बिहार में सभी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों ने अपनी तैयारी व रणनीति बनानी शुरू कर दी है.

मनीष कुमार गुप्ता
लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार

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