“लालू-रोहिणी का संदेश: तेजस्वी के सिर सजेगा ताज, या विरासत की जंग की नई शुरुआत?”

पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों राबड़ी आवास को लेकर जारी खींचतान के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) कार्यालय के बाहर लगा एक नया पोस्टर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है। इस पोस्टर में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनकी बेटी रोहिणी आचार्य की तस्वीरें लगी हैं, जिसके साथ लिखी कुछ पंक्तियां गहरे राजनीतिक मायने समेटे हुए हैं। जानकारों का मानना है कि इस पोस्टर के जरिए रोहिणी आचार्य के समर्थकों ने सीधे तौर पर राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को एक बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है।

पोस्टर की पंक्तियों में छिपा संदेश

राजद दफ्तर के बाहर लगे इस पोस्टर को किसने लगवाया है, इसका कोई आधिकारिक नाम तो सामने नहीं आया है, लेकिन इसकी भाषा से साफ है कि यह काम रोहिणी आचार्य के किसी कट्टर समर्थक का है। पोस्टर पर लिखी कविता में कहा गया है:"न हौसला टूटा है, न हिम्मत हारी है। मैं लड़ना जानती हूं, अकेले गद्दारों पर भारी हूं। मैं लालू जी की बेटी हूं, मेरा लहू बिहारी और रग-रग में खुद्दारी है।" इन आक्रामक पंक्तियों से साफ जाहिर होता है कि रोहिणी के समर्थक उनके सियासी हौसले को बुलंद दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

तेजस्वी यादव की तरफ इशारा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पोस्टर का सीधा निशाना कहीं न कहीं तेजस्वी यादव और उनके करीबियों पर है। इसके जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि चुनावी उतार-चढ़ाव के बाद भी रोहिणी का मनोबल कमजोर नहीं हुआ है और वह पार्टी या परिवार में 'गद्दारी' करने वालों से अकेले मुकाबला करने का माद्दा रखती हैं।

पारिवारिक तनाव और लालू यादव की मध्यस्थता

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब लालू प्रसाद यादव अपने नियमित हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर में रोहिणी आचार्य के पास ही रुके हुए हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही रोहिणी आचार्य अपने परिवार और पार्टी के कुछ फैसलों से नाखुश चल रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी कई बार अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए तेजस्वी यादव के बेहद करीबी और सांसद संजय यादव पर तीखे हमले किए थे। माना जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव इस समय सिंगापुर में रोहिणी को मनाने और परिवार के भीतर की इस कलह को शांत करने की कोशिशों में जुटे हैं, ताकि विधानसभा चुनाव के बाद बिखरे हुए समीकरणों को फिर से समेटा जा सके।

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