पटना हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी, भागलपुर SSP से कोर्ट ने मांगा जवाब

भागलपुर:बिहार के भागलपुर में न्यायपालिका के आदेशों के प्रति पुलिस प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली को लेकर अदालत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। भागलपुर के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र से जुड़े तीन साल पुराने एक जानलेवा हमले के मामले में पटना उच्च न्यायालय के निर्देशों की लगातार अनदेखी की जा रही थी। इस घोर प्रशासनिक लापरवाही और अदालती आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम प्रथम) सह एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अंचल द्विवेदी ने जिले के सीनियर एसपी (एसएसपी) को शोकॉज जारी कर जवाब तलब किया है।

केस डायरी और इंजरी रिपोर्ट के साथ एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का सख्त निर्देश

विशेष अदालत ने भागलपुर एसएसपी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए आगामी 18 जुलाई 2026 को सुबह ठीक 11 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का फरमान सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि नियत समय पर एसएसपी स्वयं उपस्थित होकर मामले से जुड़ी केस डायरी और पीड़ित की इंजरी (जख्म) रिपोर्ट न्यायपीठ को सौंपें। यदि पुलिस प्रमुख इस आदेश का पालन करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें अदालत को यह स्पष्ट करना होगा कि इस गंभीर न्यायिक शिथिलता के लिए उनके और संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

तीन साल बीत जाने के बाद भी सुल्तानगंज पुलिस नहीं सौंप सकी मामले के अहम दस्तावेज

यह पूरा कानूनी विवाद सुल्तानगंज थाना कांड संख्या 160/23 से जुड़ा हुआ है, जो करीब तीन वर्ष पुराना एक जानलेवा हमले का संगीन मामला है। पुलिस प्रशासन की सुस्ती का आलम यह है कि वारदात के इतने साल गुजर जाने के बावजूद जांच एजेंसी ने अब तक अदालत में केस डायरी का एक पन्ना भी जमा नहीं कराया है। इसके साथ ही, मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज यानी घायल व्यक्ति की मेडिकल इंजरी रिपोर्ट भी फाइल नहीं की गई है, जिसके चलते मामले की न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।

पुलिस की लचर तफ्तीश से कानूनी प्रक्रिया प्रभावित, न्यायपालिका ने दिखाई सख्ती

उच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद स्थानीय पुलिस द्वारा बरती जा रही इस लापरवाही ने पूरी कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष अदालत के इस कड़े कदम से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि आमतौर पर जिला पुलिस प्रमुख को सीधे तौर पर इस तरह व्यक्तिगत रूप से तलब नहीं किया जाता। अब देखना यह होगा कि 18 जुलाई को होने वाली इस अहम सुनवाई के दौरान भागलपुर पुलिस विभाग माननीय न्यायालय के समक्ष क्या स्पष्टीकरण देता है और अटकी हुई जांच रिपोर्ट पेश कर पाता है या नहीं।

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