युवक ने टावर पर चढ़कर दी जान लेने की धमकी, ऐसे बचाई गई जान

दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बहेड़ी थाना क्षेत्र के हावीडीह गांव में एक युवक जमीन से जुड़े एक कथित झूठे मुकदमे से अपना नाम हटाने की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। अक्सर पारिवारिक कलह या प्रेम प्रसंग के मामलों में ऐसे कदम उठाने की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार मामला कानूनी कार्रवाई से उपजे आक्रोश का था। युवक ने टावर की ऊंचाई से छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने की धमकी दी, जिसके बाद पूरे इलाके में लगभग सात घंटे तक भारी प्रशासनिक और सामाजिक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

झूठे मुकदमे की आशंका और युवक का आक्रोश

हावीडीह गांव के निवासी राजाराम यादव का अट्ठाईस वर्षीय पुत्र अमरजीत यादव इस बात से बेहद क्षुब्ध था कि गांव के एक भूमि विवाद से जुड़े मामले की प्राथमिकी में उसका नाम भी शामिल कर लिया गया था। युवक का यह साफ तौर पर आरोप था कि विपक्षी दल द्वारा उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत इस विवाद में घसीटा गया है ताकि उसे जेल भिजवाया जा सके। इसी नाइंसाफी और कानूनी उलझन से घबराकर उसने विरोध का यह आत्मघाती रास्ता चुना और गुरुवार की दोपहर गांव के बीचोबीच स्थित मोबाइल टावर के सबसे ऊपरी हिस्से पर जा बैठा, जिससे ग्रामीणों के बीच हड़कंप मच गया।

मौके पर ग्रामीणों की भीड़ और प्रशासनिक अमले की मुस्तैदी

जैसे ही इस घटना की भनक स्थानीय निवासियों को लगी, वैसे ही टावर के इर्द-गिर्द सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और युवक के परिजन बदहवास होकर उसे नीचे आने की गुहार लगाने लगे। मामले की संवेदनशीलता और बिगड़ते हालातों को देखते हुए बहेड़ी थाना पुलिस के साथ अंचलाधिकारी धनश्री बाला तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे। थानाध्यक्ष सूरज गुप्ता ने लाउडस्पीकर के माध्यम से युवक से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया और उसे कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने को कहा, परंतु युवक अपनी इस मांग पर अड़ा रहा कि जब तक उसका नाम इस मामले से पूरी तरह नहीं हटाया जाता और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, वह नीचे नहीं आएगा।

गुरु की सीख और लिखित आश्वासन से टला बड़ा हादसा

घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद भी जब प्रशासन को सफलता नहीं मिली, तो युवक के गुरु जटाशंकर झा को विशेष रूप से मौके पर आमंत्रित किया गया। गुरु ने माइक संभालते हुए अपने शिष्य को बेहद आत्मीयता से समझाया, जिसका युवक के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ा और उसका गुस्सा कुछ शांत हुआ। इसके तुरंत बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच करने और निर्दोष को न फंसाने का एक लिखित आश्वासन युवक को सौंपा, जिसके बाद आखिरकार लगभग सात घंटे की कड़ी जद्दोजहद के अंत में युवक को सुरक्षित रूप से नीचे उतारा जा सका और सभी ने राहत की सांस ली।

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