Friday, February 23, 2024

अंकिता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोले सारे राज़, बुलडोज़र और रिसोर्ट में आग की ये है असल वजह?

अंकिता हत्याकांड दिन पर दिन और ज्यादा उलझता जारहा है. सवालों की गिनती और गुनहगारों की हैवानियत का राज़ भी लगातार बढ़ता जारहा है. अब जो बातें सामने आर ही हैं उसे जानने के बाद पुलिस से लेकर सरकार तक और आरोपियों के दिए गए बयान तक सब पलट जाएंगे. आज हम आपको बताएँगे कि आखिर क्यों अंकिता का अंतिम संस्कार आनन फानन में किया गया. आखिर क्यों रिसोर्ट पर बुलडोज़र चलाया गया क्यों रिसोर्ट में आग लगाईं गई. आज सभी सवालों के जवाब आपको भारत नाउ देगा.
हम लगातार अंकिता हत्याकांड से जुड़े वो तथ्य आपको दिखा रहे हैं जिन्हें कहीं न कहीं छिपाने की कोशिश की जा रही है. 25 सितम्बर को अंकिता का अंतिम संस्कार किया गया. अंकिता की माँ का आरोप था कि उन्हें एक बार भी अंकिता का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया . अंकिता के पिता पर ज़बरन दाहसंस्कार का दबाव बनाया गया लेकिन क्यों . सामने आते सच और लगातार होते खुलासे जनता का आक्रोश और ज्यादा बढ़ा रहे हैं . लोगों को शक है कि कहीं न कहीं इस केस के आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है.
अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक अंकिता की मौत पानी में डूबने की वजह से हुई लेकिन अब जो सच्चाई छन कर सामने आ रही है वो इस थ्योरी को सपोर्ट नहीं करती है.
पुलिस की छानबीन कहती है कि अंकिता कि लाश पानी से करीब 6 दिन बाद निकाली गई लेकिन इतने दिनों बाद भी अंकिता की डेडबॉडी फूली क्यों नहीं थी? अगर कोई डेड बॉडी पानी में 24 घंटे से भी ज्यादा रह जाए तो शव पूरी तरह से फूल जाता है और छह दिन में तो सड़ने भी लगता है लेकिन यहाँ ऐसा कुछ नहीं था. ये बात हम नहीं बल्कि चश्मदीद गवाह सरोजनी थपलियाल ने बताया, अंकिता की डेडबॉडी को पानी से निकालने से लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल ले जाने तक मैं साथ रही थी. मैंने देखा कि डेडबॉडी बिल्कुल फूली हुई नहीं थी जबकि 6 दिन से नहर में डूबने की बात कही जा रही है. यही नहीं, दांत भी टूटे हुए थे और सीने पर खरोंच के निशान थे. इसके अलावा अंकिता की डेडबॉडी पर घाव भी थे और बाल उखड़े हुए थे. दूसरी चौंकाने वाली बात ये कि 6 दिन तक डेड बॉडी के नहर में रहने के बावजूद शव पर एक भी मछली के काटने के चोट तक नहीं है . अब सवाल ये कि डेडबॉडी पर चोट के निशान कैसे आए? यानी हो सकता है पहले अंकिता के साथ बलात्कार किया गया हो या उसे बेरहमी से टॉर्चर किया गया हो जिसमें उसे ये चोट आई और फिर हत्या के बाद उसे नहर में फेंका गया हो.

अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर आवाज उठा रहे यूजर्स आशंका जता रहे हैं कि कहीं हत्या करके अंकिता की लाश नहर में तो नहीं फेंकी गई? जबकि आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि विवाद के बाद उन्होंने अंकिता को चिल्ला नहर में धक्का दे दिया था. यानी कि कहानी इतनी सीधी नहीं लगती, जितनी बताई या दिखाई जा रही है.
कार्रवाई कि शुरुआत से अंत तक पुलिस पर और प्रसाशन पर सवाल खड़े हो रहे हैं. एक सवाल अब जो सामने आ रहा है वो ये कि अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टर्स का पैनल पूरा नहीं था. पैनल में महिला डॉक्टर मौजूद नहीं थी जबकि कानूनी रूप से किसी महिला का जब पोस्टमॉर्टेम होता है तो वहां एक महिला डॉक्टर का होना बेहद जरुरी है. ये सब दावे सरोजनी की ओर से किये गए हैं जो लाश बरामदगी से लेकर पोस्टमॉर्टेम तक छिपे राज़ों को उजागर कर रही है.

दूसरा राज़ जिसमें प्रशासन की मिलीभगत लगती है वो ये कि कि आखिर रिसोर्ट पर बुलडोज़र क्यों चलाया गया और रिसोर्ट में सिर्फ अंकिता का कमरा ही क्यों तोड़ा गया और बाद में भीड़ ने उसी कमरे को क्यों जलाया. इसके पीछे क्या वजह है. क्या उस कमरे में कुछ ऐसा था जो बाहर नहीं आना चाहिए था. आधी रात को ऐसी क्या हड़बड़ी थी कि बुलडोज़र कार्रवाई के लिए प्रसाशन ने सुबह तक का इंतज़ार भी नहीं किया. बता दें ये रूम रिसेप्शनिस्ट अंकिता को रिजॉर्ट में रहने के लिए दिया गया था लेकिन हत्या के बाद जब उस कमरे को तोड़ दिया गया तो लोग उस कार्रवाई को सबूत मिटाने की कार्रवाई से जोड़ कर देख रहे हैं.
सवाल ये भी उठ रहे हैं कि रिसोर्ट में लगे cctv कैमरे के फुटेज कहाँ गए. कहाँ गए वो वीडियो जिसमें अंकिता को पुलकित और उसके साथियों के साथ जाते तो देखा गया लेकिन आते हुए नहीं देखा गया. पुलिस उस vip गेस्ट को क्यों नहीं ढूंढ़ रही है जिसके साथ सम्बन्ध ना बनाने पर एक बेटी को अपनी जान से हाथ गवाना पड़ा. क्या ये सब पुलकित आर्य को बचाने के लिए किया जा रहा है या फिर उस vip गेस्ट को बचाने के लिए. आखिर इन सवालों के सटीक जवाब कम देगी पुलिस और प्रशासन.
हालाँकि सरकार की तरफ से पीड़ित के परिजनों को 25 लाख देने और sit जांच के साथ-साथ फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की घोषणा कर दी गई है लेकिन क्या 25 लाख से उस लड़की की जिंदगी वापस आ जाएगी, क्या अंकिता के हत्यारों को सजा मिल पाएगी. जिन लोगों ने केस से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत को नष्ट कर दिया उन लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी.
जिस तरह से विनोद आर्य और उत्तराखंड dgp अशोक कुमार के दोस्ताना सम्बन्ध सामने आये क्या इसके बाद भी निष्पक्ष जांच हो पाएगी. इन सब पहलुओं पर अगर मीडिया बात कर रही है तो प्रशासन इन सवालों को नज़र अंदाज़ क्यों कर रहा है.
अंकिता हत्याकांड से जुड़े ऐसे ही अनसुलझे सवालों को हम आपके सामने इसी तरह लाते रहेंगे. अगर आपके ज़ेहन में भी कोई सवाल है तो बताइये और हमारे साथ अंकिता और उसके परिजनों को इन्साफ दिलाने में मदद करें. क्योंकि यहाँ सवाल सिर्फ एक लड़की का नहीं बल्कि देश की सभी बहन बेटियों का है .

 

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