Sunday, April 14, 2024

जब दिल से दिल का होता है मिलन…….

शुक्रवार (30 सितंबर) को दिल्ली में 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के वितरण समारोह में फिल्मी जगत के धुरंधरों का जमावड़ा लगा. इस समारोह में वरिष्ठ फिल्म अभिनेत्री आशा पारेख को दादा साहब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया.समारोह में हिंदी फिल्म जगत के साथ साथ क्षेत्रिय फिल्मों के कलाकार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी शामिल हुए.इस दौरान एक दिल को छू लेना वाला वाकया हुआ. पुरस्कार वितरण के दौरान आशा पारेखजी की मुलाकात एक केरल की एक गायिका नानजियम्मा से हुई.आशा पारेख नानजियम्मा से इतनी प्रभावित हुई कि उनसे गाना सुनने की जिद कर बैठी.

फिर क्या  हुआ..आप भी देखिये….

आशा पारेख जी की फ़रमाइश पर इन्होंने उन्हें मलयली में गीत सुना दिया.भाषा भले ही किसी को समझ आई हो या ना आई हो,भाव सबको समझ आ गया.केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर भी गीत का आंनद लेते नजर आये.

नानजियम्मा राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता लोकगायिका हैं और केरल के एक छोटे से आदिवासी समुदाय से आती हैं . इनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है,लेकिन अपनी मेहनत और प्रतीभा के बल पर इन्होंने अपनी एक खास पहचान बनाई और आज क्षेत्रिय भाषा में पार्श्व गायिकी के लिए इन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

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