Saturday, July 4, 2026
Home मध्य प्रदेश सांची के स्तूप प्रदेश में स्थापत्यकला का अद्भुत नमूना है : डॉ....

सांची के स्तूप प्रदेश में स्थापत्यकला का अद्भुत नमूना है : डॉ. पनगढ़िया

0
195
Sanchi Stupa
Sanchi Stupa

Sanchi Stupa  भोपाल : 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने सांची स्तूप की भव्यता और कलात्मक उत्कृष्टता को देखकर प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा कि सांची के स्तूप प्रदेश में स्थापत्यकला का अद्भुत नमूना है. यह ऐतिहासिक स्थल तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में महान सम्राट अशोक द्वारा निर्मित कराया गया था और बौद्ध धर्म के महत्त्वपूर्ण केंद्रों में से एक है. सांची के स्तूप अपनी उत्कृष्ट स्थापत्य शैली और अद्भुत शिल्पकारी के लिए प्रसिद्ध हैं. यहाँ मौजूद तोरण द्वार और जटिल नक्काशीदार स्तंभ बौद्ध जातक कथाओं और घटनाओं को दर्शाते हैं.

Sanchi Stupa का 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगड़िया किया भ्रमण

मंगलवार को 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगड़िया और सदस्य श्रीमती एनी जॉर्ज मैथ्यू, डॉ. सौम्य कांति घोष एवं डॉ. मनोज पांडा ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप और ऐतिहासिक उदयगिरि गुफाओं का भ्रमण किया. उन्होंने प्रदेश के गौरवशाली इतिहास से परिचय प्राप्त किया और भारतीय संस्कृति की समृद्ध धरोहर को नजदीक से देखा. इसके पूर्व वित्त विभाग के सचिव लोकेश जाटव ने भोपाल आगमन पर आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों का एयरपोर्ट पर स्वागत किया.

वित्त आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से सांची स्तूप के इतिहास को एक रोचक कहानी के माध्यम से जाना.  बौद्ध धर्म के विकास, सम्राट अशोक की धम्म नीति और सांची के ऐतिहासिक महत्व की गहरी जानकारी प्राप्त हुई.

उदयगिरि गुफाओं में ऐतिहासिक धरोहर की झलक

आयोग के अध्यक्ष और प्रतिनिधियों ने उदयगिरि गुफाओं का भी भ्रमण किया. गुप्तकालीन इन गुफाओं में भगवान विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की अद्भुत मूर्तियां उकेरी गई हैं, जो प्राचीन भारतीय कला और धर्म का अनुपम उदाहरण हैं. उदयगिरि की 20 गुफाओं में विशेष रूप से वाराह अवतार की विशाल प्रतिमा, जिसमें भगवान विष्णु पृथ्वी को समुद्र से निकालते हुए दिखाए गए हैं, ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. वित्त आयोग के सदस्यों ने कहा कि सांची और उदयगिरि जैसे ऐतिहासिक स्थल भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के अमूल्य प्रतीक हैं. इन स्थलों का संरक्षण और प्रचार-प्रसार भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है.