Sunday, June 28, 2026
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मुआवजे की राशि से EMI काटने पर केरल हाईकोर्ट ने लगाई फटकार,कहा कि खत्म हो चुकी है लोगों में संवेदना

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Wayanad EMI Deduction
Wayanad EMI Deduction

Wayanad EMI Deduction :पिछले दिनों वायनाड में लैंड स्लाईड के कारण आई भीषण तबाही के बाद मिले मुआवजे की राशि से बैक के द्वारा ईएमआई (EMI) काट लिये जाने पर केरल हाईकोर्ट ने सरकार को जमकर फटकार लगाई है. हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए अपनी टिप्पणी में कहा कि “लोगों में संवेदना खत्म हो चुकी है. हम घटना के मानवीय पहलू से चूक रहे हैं. त्रासदी के पहले हफ्ते में सब रोते हैं,फिर अगले हफ्ते ऐसी हरकतें करते हैं.”

Wayanad EMI Deduction मामले में हाई कोर्ट ने कही बड़ी बातें 

केरल हाईकोर्ट के दो दजों की बेंच में जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार- और जस्टिस श्याम कुमार वीएम ने कहा कि वायनाड में हुआ भूस्खलन इंसानों के लालच और उदासीनता का एक और उदाहरण है. हाईकोर्ट ने कहा कि इस त्रासदी के संकेत बहुत पहले से मिल रहे थे लेकिन विकास के एजेंडे के नाम पर उन्हें नजरअंदाज किया गया. 2018 , 2019 में आई प्राकृतिक आपदाएं, दो सालों तक चली कोरोना महामारी और इस लैंडस्लाइड ने हमें हमारे विकास के तरीकों में गलती दिखाई है.

मुआवजे के पैसों से बैंक ने काटा था EMI  

ये मामला केरल के वायनाड में पिछले महीने 29 जुलाई को आये लैंडस्लाइड का है.  हादसे में अब तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं. भयानक त्रासदी की हालत में राज्य सरकार ने लैंडस्लाइड से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत के लिए 10-10 हजार रुपया उनके बैंक अकाउंट में दिया था.

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि है कि राज्य के ग्रामीण बैंक उनके मुआवजे में मिले पैसे से बैंकलोन की EMI काट रहा है. इस मामले में कुछ दिन पहले लोगों ने कलपेट्टा इलाके में विरोध प्रदर्शन भी किया था.बाद में हंगामें के बाद बैंक के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी पीडितों को लिखित में दिया था कि अब वो लोन की EMI नहीं काटेंगे.

इस बीच आपदा पीडितों को मिल रहे मुआवजे की निगरानी के लिए हाईकोर्ट ने  खुद संज्ञान लिया  और मामले पर 23 अगस्त को सुनवाई हुई. EMI मामला सामने आने पर हाईकोर्ट ने केरल सरकार से पूछा कि कितने लोगों के साथ ऐसा हुआ है और अगर ऐसा हुआ है तो हम मामले में दखल देंगे.

हाईकोर्ट करेगा सरकार की नीतियों की निगरानी

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि कोर्ट राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन, वनों, पर्यावरण और जंगली जीवों के संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम और उनके मैनेजमेंट के लिए बनाई गई राज्य सरकार की नीतियों का जायजा भी लेगी. कोर्ट ने राज्य सरकार की नीतियों का जायजा लेने के लिए तीन चरण तय किए हैं.

पहला चरण :  प्राकृतिक आपदाओं को रोकने के लिए कोर्ट वैज्ञानिक उपायों पर जानकारी जमा करेगा और हर सप्ताह भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत कार्यों की निगरानी करेगा.

दूसरा चरण : इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि क्या राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरों पर रेगुलेटरी डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी और उनके सलाहकार बोर्ड को विषेशज्ञों के द्वारा ठीक तरीके से चलाया जा रहा है ?  इस चरण में अदालत ये भी तय करेगा कि अगर किसी निकाय ने कोई उपयुक्त सुझाव दिया है तो उसे कानूनी संशोधन करके राज्य सरकार के सामने रखा जाये.

तीसरा चरण : प्राकृतिक हो या किसी अन्य तरह की आपदा, उसे रोकने के लिए उपायों को लागू किया जाएगा. इस चरण में उच्च न्यायलय ये​ तय करेगा कि किसी भी क्षेत्र के पर्यावऱण को प्रभावित करने वाले किसी भी फैसले से पहले वहां के स्थानीय लोगों की राय ली जाए.

 ग्रामीणों का पैसा वापस करें बैंक – हाईकोर्ट का निर्देश

हाईकोर्ट के सवाल के बाद राज्यस्तरीय बैंकर्स कमेटी (SLBC) के जनरल मैनेजर केएस प्रदीप ने कोर्ट को बताया कि लोन की EMI काटने का आदेश आपदा से पहले दिया गया था. इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन लोगों का पैसा बैंक ने काटा है उसे वापस किया जाये.