Saturday, February 28, 2026

MANREGA Scheme : मनरेगा से बना बकरी पालन शेड तो कांशीराम के चेहरे की बढ़ गई मुस्कान

MANREGA Scheme :  रायपुर : छोटे-छोटे स्वरोजगारों को अपनाकर लोग आर्थिक रुप से आगे बढ़ रहे हैं और वर्तमान समय में लोगों का रुझान बकरीपालन की तरफ तेजी से बढ़ते जा रहा है. राज्य सरकार भी स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का काम कर रही है. ऐसे में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल के किसान बकरीपालन कर अपनी सफलता की नई कहानी गढ़ रहे हैं और लोगों के लिए नई मिसाल बन रहे हैं. ऐसे ही हैं हरदी विशाल के रहने वाले कांशीराम, जिन्होंने अपनी किस्मत को दूसरों के भरोसे पर नहीं छोड़ा बल्कि बदलते समय के साथ अपने को मजबूत बनाया और अपनी मेहनत के बल से अपनी किस्मत को बदल दिया.

MANREGA Scheme ने बदला जीवन

जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा विकासखण्ड की ग्राम पंचायत हरदीविशाल निवासी कांशीराम अपने परिवार चलाने के लिए वह अपने खेती-किसानी पर ही निर्भर था और अपने परिवार का गुजारा चलाता था. इसके अलावा उनकी आय का कोई अन्य जरिया नहीं था. फिर कुछ साल पहले उन्होंने बकरी पालन कार्य शुरू किया और कम समय में ही बकरी पालन के व्यवसाय से अच्छा लाभ अर्जित करने लगा, लेकिन उनके सामने एक बड़ी समस्या खड़ी थी कि जिस घर में वह बकरी पालन का कार्य करता था, वह मिट्टी का था और जर्जर हो चुका था. ऐसे में बारिश और ठंड में बकरियों को सुरक्षित रखना उनके लिए मुश्किल हो रहा था. बीमारियों के चलते कई बार बकरियों की मृत्यु भी हो जाती थी, जिससे उन्हें बहुत अधिक नुकसान उठाना पड़ता था, जितनी भी आमदनी बकरीपालन से होती थी, उससे ही गुजरा बसर चल रहा था.

बकरी पालन करके जीवन बसर करना हो रहा था मुश्किल

कांशीराम बताते हैं कि उनके पास वर्तमान में 20 बकरी है. एक वर्ष के अंतराल में चार बकरी को बेचकर बीस हजार रुपया कमाया और अपने परिवार का जीवन यापन में खर्च किया एवं चार वर्ष के अंतराल में 40 बकरी को बेचकर दो लाख रूपये कमाया. इस आमदनी से बच्चों की पढ़ाई, खेत एवं घर बनाने में खर्च किया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई थी क्योंकि अब भी बकरियों को रखने के लिए उनके पास कोई पक्का घर नहीं था. ऐसे में  कांशीराम बताते हैं कि इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के व्यक्तिगत हितग्राही मूलक कार्य के तहत ग्राम पंचायत में बकरी पालन शेड के लिए आवेदन किया. आवेदन की मंजूरी के बाद 93 हजार 63 रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली और एक पक्का शेड बनवाया. इस निर्माण कार्य के दौरान कांशीराम के परिवार को 52 दिनों का रोजगार भी प्राप्त हुआ. शेड बनने के बाद कांशीराम ने अपनी बकरियों को सुरक्षित छत प्रदान किया, जिससे उनकी बकरियों की सेहत में सुधार हुआ और उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई.

मनेरगा से मदद मिली तो आर्थिक स्थिति मजबूत हुई 

कांशीराम का कहना है कि अगर मनरेगा से शेड बनाने में मदद नहीं मिली होती, तो यह उनके लिए संभव नहीं था..अब वे अपने बकरी पालन व्यवसाय को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी और परिवार की आय से वह अपने बकरी पालन के व्यवसाय को आगे बढ़ा सकेगा.

क्या है MGNREGA य़ोजना

वर्ष 2005 में कांग्रेस के शासन काल में  ग्रामीण विकास मंत्रालय  के द्वारा विश्व का सबसे बड़ा रोज़गार गारंटी कार्यक्रम शुरु किया गया. ये योजना किसी भी वयस्क  व्यक्ति, जो काम के लिए इच्छुक हो उसे न्यूनतम वेतन पर सार्वजनिक कार्यों से संबंधित अकुशल शारीरिक कार्य करने के एक साल में कम से कम सौ दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है. MGNREGA के जरिये सरकार ने ये सुनिश्चत किया कि कोई भी ग्रामीण वयस्क कार्य के लिये अनुरोध कर सकता है और उसे 15 दिनों के भीतर कार्य मिलना चाहिये. अगर सरकार उस व्यक्ति को 15 दिन के भीतर रोजगार नहीं देती है , सरकार उसे “बेरोज़गारी भत्ता” देने के लिए प्रतिबद्ध होगी. इस योजना के तहत सरकार ने ये तय किया कि योजना का लाभ महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा मिल सके. योजना के लाभार्थियों मे कम से कम 30 प्रतिशत महिलाएं हों, जिन्होंने पंजीकरण कराकर काम के लिये अनुरोध किया हो.

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