Chhattisgarh Balodabazar violence : छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार हिंसा मामले में सरकार ने तत्कालीन जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक पर फिर से कार्रवाई हुई है. दो दिन पहले ही हिंसा के समय जिले में पदस्थापित जिलाधिकारी केएल चौहान और एसपी सदानंद कुमार पर कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके पद से हटा दिया गया था, और उनके स्थान पर दीपक सोनी को जिला कलेक्टर और विजय अग्रवाल को पुलिस अधीक्षक का कार्यभार सौंपा गया था.
Chhattisgarh Balodabazar violence: लापरवाही के मामले मे किये गये निलंबित
बलौदाबाजार के तत्कालीन जिलाधिकारी केएल चौहान और पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार पर लापरवाही बरतने के मामले में कार्रवाई की गई है. दरअसल दस जून को बलौदा बाजार में 7-8 हजार लोग एक साथ प्रदर्शन करने पहुंचे थे, बाद में ये प्रदर्शन उग्र हिंसा में तब्दील हो गई. प्रदर्शन के दौरान सतनामी समाज के लोगों ने जम कर उत्पात मचाया. जिला कार्यालय में आग लगा दी, वहीं सड़कों पर खड़े सैंकड़ों वाहनों को तोड़-फोड़ दिया और उन्हे फूंक दिया. पूरे शहर में उत्पात मच गया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर और एसपी के आफिस पर पत्थरबाजी की और संयुक्त कार्यालय में आग लगा दिया था.
हालात को नियंत्रित करने के लिए लगाना पड़ा धारा 144
प्रदर्शनकारी भीड़ इतनी उग्र थी कि उन्होंने जो सामने आया उसे तोड़-फोड़ दिया , आग लगा दी. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने वहां लगे तमाम सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिये. इस पूरे हंगामे को काबू करने में 25 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गये , उन्हे अस्पताल मे भर्ती कराना पडा, इस दौरान पुलिस ने 60 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया था.
सतनामी समाज के क्यों किया प्रदर्शन ?
दरअसल बलौदाबाजार के गिरौदपुरी में सतमानी समाज के तीर्थ स्थल ‘अमर गुफा’ के पवित्र जैतखाम को कुछ अज्ञात लोगों ने 15 मई को क्षतिग्रस्त कर दिया था. सतनामी समाज के विरोध के बाद पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया . लेकिन नाराज सतमानी समाज के लोगों का आरोप था कि पुलिस ने जिन्हें गिरफ्तार किया है, वो असली गुनाहगार नहीं है. पुलिस असली अपराधियों को बचा रही है. इस बात को लेकर इसी महीने की 8 जून को जिला कलेक्टर और सतमानी समाज के लोगों के बीच मीटिंग हुई , इसके बाद 9 जून को गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए . इस मीटिंग के बाद सतनामी समाज के लोगों ने 10 जून को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में प्रदर्शन की प्रशासन से अनुमति मांगी थी. पुलिस प्रशासन को मालूम था कि ये लोग प्रदर्शन के लिए आने वाले हैं फिर भी पुलिस की तरफ से वो तैयारी नहीं की गई जो इतने बड़े प्रदर्शन के देखते हुए करना चाहिये था. प्रदर्शन के दौरान लोगों के साथ पुलिस के रवैये ने हालात को भड़का दिया और प्रदर्शनकारी उग्र हो गए.

