Kumaon forest fire : कुमाऊं के जंगलों की आग बुझाने में पहुंचे वायुसेना के हेलीकॉप्टर

नैनीताल Kumaon forest fire कुमाऊं के जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने शनिवार से भीमताल झील से पानी भरकर जंगलों में पानी डालने का काम करना शुरू कर दिया है. शनिवार की सुबह वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने भीमताल झील से पानी भरकर नैनीताल के जंगलों में लगी आग पर डाला. वन क्षेत्राधिकारी विजय मेलकानी ने बताया कि जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली गई है.

Kumaon forest fire वन संपदा को पहुंचा है भारी नुकसान 

मेलकनी ने बताया कि हेलीकॉप्टर ने अभी तक तीन बार झील से पानी भरकर जंगलों में लगी आग पर डालना शुरू कर दिया है. मेलकानी ने बताया कि वन विभाग के कर्मचारी भी आग बुझाने में लगे हुए हैं. इस आग से अब तक 50 हजार हेक्टेयर जंगल  को नुकसान हुआ है. भीमताल, पाइंस, रानीबाग, सातताल, बेतालघाट और रामगढ़ के जंगलों की वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है.

क्यों और कैसे लग जाती है जंगल में आग

जंगलों मे कई वजहों से आग लगती है. उत्तराखंड के जंगल मे ज्यादातर चीड़ के पेड़ हैं. चीड़ के पेड क पत्ति अत्यधिक सूखी होने के कारण अक्सर आग लगने की वजह बनती हैं.    पत्तियों के अधिक सूख जाने के बाद जब पेड़ हवा चलने के बाद  आपस में टकरात है तो इनके घर्षण से आग पैदा होती है और वही जंगल में फैल जाती है. चीड़ के पेड़ से एअक तरल निकलता है जिसे लेसी कहा जाता है. लेसी एक तरह से अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ है. कहा जाता है कि ये पेट्रोल के जितनी तेजी से जलने वाला तरल पदार्थ हैं. ऐसे में  अकसर देखा गया है कि इसन रास्तों से निकलन वाले लो अगर बीड़ी या सिगरे जैसी चीजें पीकर फेंक देते हैं तो उनसे भी आग लग जाती है और एक बार जंगल में आग पकड़ या तो उसे रोकना मुश्किल हो जाता है.

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