Monday, January 26, 2026

विंध्य धरा से ज्योतिष गणना करता था रावण, इसी मंदिर से हुआ समय का आरम्भ ?

भारत देश का अस्तित्व और यहां की पौराणिक कहानियां सदियों पुरानी है. हर दिशा में मनमोहलेने वाले मंदिर और आश्चर्य चकित कर देने वाले उनके रहस्य पूरी दुनिया को आकर्षित करते हैं. तो आज हम आपको एक ऐसी रहस्यमयी जगह के बारे में बताने जा रहें है. जिसके प्रति रावण की भी अटूट आस्था हुआ करती थी. बता दें लंकाधिपति रावण भी अपनी ज्योतिष गणित की गणना के लिए विंध्याचल की शरण में आता था. तब से अब तक विंध्य धरा का अमरावती चौराहे के पास का स्थल भारत के मानक समय को प्रभावित कर रहा है. यह जगह भारत के 82.5 पूर्वी हिस्से में स्थित है.

भारत का मानक समय (Indian Standard Time) विंध्याचल से ही लिया जाता है. बता दें विद्यांचल उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर ज़िले का एक शहर है. जहाँ पहुँचकर साल 2007 में भूगोल विदों के एक दल ने विन्ध्याचल के अमरावती चौराहे के पास मौजूद इस स्थल को मानक समय के स्थल के रूप में चिह्नित किया था. सटीक भौगोलिक स्थिति के खोजकर्ता SPSE यानी (साइज पाल्युराइजेशन एसोसिएशन आफ कम्यूनिकेट्स एंड एजूकेशन) हैं. विंध्याचल के आध्यात्मिक धर्म गुरु पं. त्रियोगी मिट्ठू मिश्र बताते हैं कि विंध्य धरा को मां बिंदवासिनी का दरबार भी कहते हैं. महारानी मां बिंदुवासिनी अपनी संपूर्ण कलाओं के साथ यहां विद्यमान हैं. बिंदु के बिना एक छोटी रेखा भी नहीं खींची जा सकती है और मां बिंदुवासिनी की कृपा के बिना सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी. इस स्तहल की मान्यता इतनी ज्यादा ज्यादा है कि ऐसा कहा जाता है रावण भी अपनी ज्योतिष गणना के लिए समय यहीं से लिया करता था. यही नहीं रावण ने यहां मां के मंदिर के समीप शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसे बिंदेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है, जो आध्यात्मिक जगत के मानक समय का सूचक भी है.

बता दें मानक समय के पास खड़ा होना रोमांच से कम नहीं मिर्जापुर में बहुत से ऐसे स्थान हैं जिसके महत्व का वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पुराणों में भी जिक्र है. इसमें मानक समय केंद्र भी है. जहां से भारत का समय निर्धारित होता है.

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