प्रयागराज निठारी कांड (Nithari Kand) में फांसी की सजा के खिलाफ मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके केयर टेकर सुरेंद्र कोली की अपील पर इलाहाबाद हाइकोर्ट में बहस चल रही है. सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी.
पंढेर और कोली के खिलाफ CBI के सबूत कम
निठारी कांड (Nithari Kand) के आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके केयर टेकर सुरेंद्र कोली की अपील पर सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तऔर न्यायमूर्ति एस एच ए रिजवी की खंडपीठ कर रही है. अभी तक अपील करने वालों की तरफ से नाले से बरामद लाशों के टुकड़ों के सबूतों को CBI द्वारा साबित करने में विफल रहने और नालों से बरामद कंकालों के बारे में दो कांस्टेबलों के बयानों में भिन्नता का मुद्दा पढेर और कोली के वकीलों की तरफ से उठाया गया. आरोपियों की तरफ से बहस पूरी होने के बाद मंगलवार को CBI की तरफ से बहस शुरू हुई.
कोली को 16 मामलों और पंढेर को 2 मामलों में हुई है फांसी की सजा
संजय यादव व जितेंद्र प्रसाद मिश्र का कहना है कि बरामद कुछ मानव अवशेषों का डी एन ए टेस्ट कराया गया और कुछ के कपड़े चप्पल आदि साक्ष्यों से पुष्टि की गई है. विशेष अदालत ने जघन्य अपराध का दोषी करार देते हुए सुरेंद्र कोली को 16 मामलो में फांसी की सजा दी है और पंढेर को भी दो मामलों में फांसी की सजा मिली है. कई केसों में विदेश में होने के कारण बरी कर दिया गया है.
नोयडा का निठारी कांड
मामला 2006 में खुला जब गौतमबुद्धनगर के निठारी गांव की लड़कियां गायब हो रही थी.एक दिन नाले से मानव कंकाल के अवशेष मिले.जांच CBI को सौंपी गई. CBI जांच में दर्जनों लड़कियों के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले का खुलासा हुआ. नोएडा के निठारी गांव में स्थित मनिंदर सिंह पंढेर की कोठी में घटनाएं घटित हुई. CBI कोर्ट गाजियाबाद ने कुल 17 मामलों में से 16 में सुरेंद्र कोली को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है. इसमें से एक केस में फांसी पर राष्ट्रपति के समक्ष अर्जी तय करने में देरी को आधार बना हाईकोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में बदल दिया. बाकी के 15 मामलों में मिली सजा पर इलागाबाद हाईकोर्ट में अपीलों पर सुनवाई जारी है. अदालत ने उन जेलों से भी रिपोर्ट मांगी है जिसमें पंढेर और कोली बंद हैं. इन जेलों से उनके व्यवहार के बारे में रिपोर्ट मांगी गई है.

