चंडीगढ़। पंजाब के मानसा जिले के चर्चित नशा विरोधी कार्यकर्ता (एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट) परविंदर सिंह झोटा के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम एक बार फिर तकनीकी कारणों से अटक गया है। पीजीआई चंडीगढ़ में सुबह 10 बजे विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा पोस्टमार्टम करने का प्रयास किया गया, किंतु उन्हें सफलता हासिल नहीं हो सकी। अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शव को पिछले कई दिनों से फ्रीजर में सुरक्षित रखे जाने की वजह से वह अंदरूनी तौर पर पूरी तरह सख्त हो चुका है, जिसके कारण अंदरूनी अंगों का परीक्षण कर पाना डॉक्टरों के लिए बेहद जटिल साबित हो रहा है।
हीट ट्रीटमेंट के जरिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी
पीजीआई की मेडिकल टीम के अनुसार, अब शव को विशेष तकनीकी प्रक्रिया के तहत हीट (ऊष्मा) दी जा रही है ताकि उसके अंदरूनी हिस्से थोड़े ढीले हो सकें और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को निर्बाध रूप से पूरा किया जा सके। डॉक्टरों का विशेष दल लगातार प्रयास में जुटा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने दोपहर करीब 12 बजे दोबारा पोस्टमार्टम शुरू करने की योजना बनाई है। चंडीगढ़ में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया संपन्न होने के तत्काल बाद पार्थिव शरीर को मानसा लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय व जन-सम्मान के बीच उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
प्रशासनिक सतर्कता और पुलिस प्रशासन की पैनी नजर
झोटा के शव का पोस्टमार्टम और उसके बाद मानसा में होने वाले अंतिम संस्कार को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड पर है। पीजीआई चंडीगढ़ में एक डीएसपी स्तर के अधिकारी समेत पंजाब पुलिस का दल लगातार मौजूद है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम संस्कार के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने तक मानसा, बठिंडा तथा फरीदकोट जिलों की पुलिस के साथ-साथ आला प्रशासनिक अधिकारियों की नजरें पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, ताकि शांति एवं कानून व्यवस्था बनी रहे।
सरकारी सहमति के बाद झोटा इंसाफ मोर्चा स्थगित करने की तैयारी
दूसरी ओर, पंजाब सरकार द्वारा परिजनों और संघर्ष समिति की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कर लिए जाने के पश्चात अब 'झोटा इंसाफ मोर्चा' को स्थगित करने की तैयारी की जा रही है। मोर्चे से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने के उपरांत इस आंदोलन को स्थगित करने का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा। हालांकि, आंदोलनकारियों ने यह भी साफ किया है कि मोर्चे को पूरी तरह समाप्त करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है, ताकि यदि भविष्य में सरकार द्वारा वादों को पूरा करने में कोई कोताही बरती जाती है तो संघर्ष को दोबारा शुरू किया जा सके।
दिनदहाड़े हुई हत्या और 23 दिनों के संघर्ष के बाद बनी सहमति
उल्लेखनीय है कि नशामुक्ति अभियान से जुड़े परविंदर सिंह झोटा की गत 13 अक्तूबर को मानसा में दिनदहाड़े गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे पंजाब में व्यापक जन-आक्रोश फैल गया था और पीड़ित परिवार इंसाफ की मांग को लेकर अड़ गया था। झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए 23 दिनों तक चले लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार पंजाब सरकार और एक्शन कमेटी के बीच सहमति बन सकी। समझौते के तहत पीड़ित परिवार को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भरोसा दिया गया है, साथ ही दलजीत सिंह भम्मे के परिवार को भी आर्थिक सहायता और नौकरी देने की बात स्वीकार की गई है।

