प्रकाश के महापर्व दिवाली के ठीक एक दिन पूर्व आने वाले नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली के पावन पर्व पर सजने-संवरने और अपनी त्वचा की विशेष देखभाल करने का पारंपरिक महत्व रहा है। इस विशेष अवसर पर प्राचीन काल से ही घरों में प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर अभ्यंग स्नान करने और शरीर पर प्राकृतिक उबटन लगाने की समृद्ध परंपरा चली आ रही है। ऐसी गहरी धार्मिक एवं आयुर्वेदिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से उबटन का लेप लगाकर स्नान करने से शारीरिक शुद्धि होती है, त्वचा की चमक बढ़ती है और शरीर को अद्भुत ताजगी प्राप्त होती है।
त्वचा की चमक बढ़ाने के लिए बेसन और हल्दी का उबटन
भारतीय संस्कृति और घरेलू सौंदर्य अनुष्ठानों में बेसन और हल्दी का उबटन सबसे प्राचीन और लोकप्रिय विकल्प माना जाता है। इसे तैयार करने के लिए दो चम्मच बेसन में एक चुटकी शुद्ध हल्दी तथा आवश्यकतानुसार कच्चा दूध या जल मिलाकर एक चिकना पेस्ट बना लिया जाता है। इस प्राकृतिक लेप को चेहरे, गर्दन तथा हाथों-पैरों पर अच्छी तरह लगाया जाता है। लगभग दस मिनट तक सूखने देने के पश्चात इसे हल्के हाथों से गोलाकार मसाज करते हुए पानी से साफ कर लिया जाता है। यह उबटन त्वचा की ऊपरी सतह पर जमी धूल-मिट्टी और मृत कोशिकाओं को हटाकर त्वचा को कोमल और चमकदार बनाने में मदद करता है।
त्वचा को प्राकृतिक ठंडक देने वाला चंदन और गुलाब जल उबटन
त्वचा की देखभाल के लिए प्राचीन काल से ही चंदन को एक अत्यंत गुणकारी और शीतलता प्रदान करने वाला घटक माना गया है। चंदन पाउडर और गुलाब जल के संमिश्रण से तैयार किया जाने वाला यह उबटन त्वचा को एक सुखद ठंडक और भीनी-भीनी खुशबू प्रदान करता है। इस उबटन को बनाने के लिए दो चम्मच चंदन पाउडर में पर्याप्त मात्रा में गुलाब जल मिलाकर एक लेप तैयार किया जाता है, जिसे चेहरे पर समान रूप से लगाया जाता है। पेस्ट के पूरी तरह सूखने से पहले ही इसे ताजे पानी से धो लिया जाता है। हालांकि, अत्यधिक संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसके प्रयोग से पूर्व पैच टेस्ट अवश्य कर लेना चाहिए।
तैलीय त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का लेप
यदि आप अपनी त्वचा की गहरी सफाई के लिए किसी प्रभावी प्राकृतिक और हल्के विकल्प की तलाश में हैं, तो मुल्तानी मिट्टी का उपयोग बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इसे तैयार करने की विधि के अंतर्गत दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर एक समान पेस्ट तैयार किया जाता है। इस लेप को चेहरे पर बहुत मोटी परत के बजाय एक हल्की परत के रूप में लगाया जाता है और कुछ मिनटों के बाद सामान्य पानी से धो लिया जाता है। यह विशेष रूप से तैलीय त्वचा के लिए उपयुक्त माना जाता है क्योंकि यह अतिरिक्त तैलीयपन को नियंत्रित करने में सहायक होता है, हालांकि रूखी या अति-संवेदनशील त्वचा वाले जातकों को इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
त्वचा को कोमल बनाने वाला मलाई और दूध का पारंपरिक उबटन
त्वचा के रूखेपन को दूर कर उसे रेशमी व मुलायम बनाने के लिए दूध और मलाई के पारंपरिक नुस्खों का लंबे समय से उपयोग होता रहा है। इस उबटन को तैयार करने के लिए दो चम्मच बेसन में एक चम्मच ताजी मलाई और थोड़ा सा दूध मिलाकर एक समृद्ध पेस्ट बनाया जाता है। इस मिश्रण को चेहरे और हाथों पर लगाकर लगभग दस मिनट के लिए छोड़ दिया जाता है और बाद में सामान्य जल से धो लिया जाता है। यह त्वचा को गहराई से पोषण देकर उसे लंबे समय तक कोमल बनाए रखता है, हालांकि जिन लोगों को दुग्ध उत्पादों से किसी प्रकार की एलर्जी है, उन्हें इसके प्रयोग से बचना चाहिए।
त्वचा की बनावट सुधारने के लिए चावल के आटे और दही का उबटन
चावल के आटे और सादा दही का यह संयोजन त्वचा के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक क्लींजर की तरह कार्य करता है। इस उबटन को बनाने के वास्ते दो चम्मच चावल के आटे में एक चम्मच ताजा दही और आवश्यकतानुसार जल मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है। इसे चेहरे पर बहुत ही हल्के हाथों से लगाया जाता है और कुछ देर बाद पानी से धो लिया जाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि इसे चेहरे पर जोर-जोर से रगड़कर स्क्रब की तरह इस्तेमाल न किया जाए, अन्यथा नाजुक त्वचा पर रगड़ लगने से जलन या लालिमा की समस्या हो सकती है।

