नक्सलियों पर अदालत का शिकंजा, सुरक्षाबलों पर हमले के दोषियों को 10-10 साल की कैद

कांकेर। छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर स्थित विशेष राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अदालत के न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता ने सुरक्षाबलों पर जानलेवा हमला करने और प्रतिबंधित गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त रहने के गंभीर अपराध में तीन दुर्दांत नक्सलियों को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। माननीय न्यायालय द्वारा पारित इस निर्णय के तहत तीनों दोषियों पर अलग-अलग साढ़े तीन हजार रुपये का आर्थिक दंड भी अधारित किया गया है। जिन नक्सलियों को यह सजा दी गई है, उनमें पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम (35 वर्ष), रमेश पुनेम उर्फ बुधरू (25 वर्ष) तथा पुनऊ राम मंडावी (22 वर्ष) सम्मिलित हैं, जिन्हें पूर्व में कोयलीबेड़ा थानांतर्गत घने जंगलों से सुनियोजित घेराबंदी के पश्चात गिरफ्तार किया गया था। इस संपूर्ण संवेदनशील मामले की गहन और तथ्यपरक विवेचना अंतागढ़ के तत्कालीन अनुविभागीय पुलिस अधिकारी अमर सिदार द्वारा संपन्न की गई थी।

सुरक्षाबलों का संयुक्त तलाशी एवं सर्च ऑपरेशन

यह पूरा घटनाक्रम अठारह मई, दो हजार तेरह को कांकेर जिले के अत्यंत नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत घटित हुआ था। क्षेत्र में प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के सशस्त्र काडरों के सक्रिय होने और किसी बड़ी साजिश की पुख्ता सूचना सुरक्षा एजेंसियों को मिली थी। इस खुफिया इनपुट के आधार पर चिलपरस और ढूंट्टा स्थित कैंपों से सुरक्षाबलों के अनुभवी जवानों की एक संयुक्त टुकड़ी गठित कर कॉम्बिंग ऑपरेशन के लिए रवाना की गई थी। अभियान के दौरान सुरक्षाकर्मी कागबरस, नयापारा और चिलपरस के दुर्गम तथा सघन जंगलों को खंगालते हुए केसोकोड़ी की दिशा में आगे बढ़ रहे थे, तभी यह मुठभेड़ और गिरफ्तारी की कार्रवाई सामने आई।

जंगल में घेराबंदी और जवानों पर हमला

सर्चिंग के दौरान पहाड़ी और जंगली इलाके के करीब सुरक्षाबलों की नजर तीन संदिग्ध व्यक्तियों की संदिग्ध गतिविधियों पर पड़ी। पुलिस बल को नजदीक आते देख तीनों संदिग्धों ने घबराकर भागने का प्रयास किया, किंतु सतर्क जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए चतर तरफ से कड़ा घेरा डालकर तीनों को धर दबोचा। गिरफ्तारी के उस कठिन क्षण में आरोपियों ने कानून के शिकंजे से बचने के लिए सुरक्षाबलों पर आक्रामक हमला कर दिया, जिससे मुठभेड़ और हाथापाई के दौरान एक जवान के दाहिने हाथ में गंभीर चोट आ गई थी। इसके बावजूद जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारी विरोध के बीच तीनों हमलावरों को पूरी तरह नियंत्रित कर अपनी हिरासत में ले लिया।

आपत्तिजनक सामग्री बरामदगी और कानूनी कार्रवाई

पकड़े गए संदिग्धों की मौके पर ली गई तलाशी के दौरान उनके पास से वायरलेस वॉकी-टॉकी सेट, प्रतिबंधित नक्सली साहित्य, संगठन से जुड़े पत्र, नगद राशि, गुलेल, टॉर्च और धारदार चाकू सहित भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गईं। इस घटना के तुरंत पश्चात कोयलीबेड़ा थाने में आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से राज्य शासन का प्रतिनिधित्व करते हुए अपर लोक अभियोजक टी.एस. यादव ने बेहद मजबूत दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर अदालत ने यह ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है।

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