अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट द्वारा टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े महारथी सचिन तेंदुलकर के सर्वाधिक रनों के ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड को ध्वस्त करने की संभावनाओं पर इन दिनों खेल गलियारों में जोरदार चर्चा छिड़ी हुई है। इसी क्रम में महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने जो रूट की अविश्वसनीय फॉर्म और खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की खुलकर प्रशंसा की है। सचिन ने साझा किया कि वे रूट की असाधारण प्रतिभा को उनके करियर के पहले टेस्ट मैच से ही भाप गए थे और उन्हें पूरा विश्वास था कि यह खिलाड़ी क्रिकेट जगत में मील के पत्थर स्थापित करेगा। इसके साथ ही, मास्टर ब्लास्टर ने आधुनिक एकदिवसीय (वनडे) क्रिकेट के प्रारूप में सुधारात्मक बदलाव करने के अपने पुराने विचार को एक बार फिर पुरजोर तरीके से सामने रखा है।
सचिन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की ओर बढ़ते जो रूट
वर्तमान समय में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट टेस्ट इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे पायदान पर मजबूती से काबिज हैं। रूट के नाम अब तक खेले गए 169 टेस्ट मैचों की 309 पारियों में कुल 14,278 रन दर्ज हो चुके हैं। वह महान सचिन तेंदुलकर के अजेय रिकॉर्ड से अब केवल 1,643 रन की दूरी पर खड़े हैं। उल्लेखनीय है कि सचिन ने अपने स्वर्णिम टेस्ट करियर में 200 मुकाबलों की 329 पारियों में कुल 15,921 रन बनाकर सर्वोच्च शिखर हासिल किया था। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर आयोजित एक विशेष 'आस्क मी एनीथिंग' (AMA) सत्र के दौरान जब सचिन से जो रूट के इस रिकॉर्ड को तोड़ने की संभावनाओं के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने रूट की तकनीकी दक्षता और प्रतिभा को उनके पदार्पण मैच में ही पहचान लिया था।
मैदान पर पुराना जुड़ाव और पसंदीदा बल्लेबाज
जो रूट ने दिसंबर 2012 में नागपुर के मैदान पर भारत के विरुद्ध ही अपने टेस्ट करियर का ऐतिहासिक आगाज किया था, और संयोगवश उस मुकाबले में भारतीय टीम की तरफ से खुद सचिन तेंदुलकर भी मैदान पर खेल रहे थे। अपने पहले ही टेस्ट मैच की पहली पारी में रूट ने धैर्य का परिचय देते हुए 229 गेंदों पर 73 रनों की शानदार पारी खेली थी, जबकि दूसरी पारी में वे 20 रन बनाकर नाबाद रहे थे और वह मुकाबला बराबरी पर छूटा था। इसी बातचीत के दौरान जब सचिन से उनके वर्तमान दौर के पसंदीदा गैर-भारतीय बल्लेबाजों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जो रूट के अलावा इंग्लैंड के ही युवा सनसनी हैरी ब्रूक और ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज स्टीव स्मिथ का विशेष रूप से उल्लेख किया।
वनडे क्रिकेट के स्वरूप में बदलाव का सचिन का सुझाव
इस अवसर पर सचिन तेंदुलकर ने 50 ओवरों के एकदिवसीय क्रिकेट प्रारूप की वर्तमान लोकप्रियता और प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने के लिए एक बार फिर अपने क्रांतिकारी बदलाव के सुझाव को दोहराया। उनका मानना है कि खेल के रोमांच को बढ़ाने के लिए पचास ओवर के मैच को प्रत्येक टीम के लिए पच्चीस-पच्चीस ओवर की दो पारियों में विभाजित कर देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी पचास ओवर की अवधि के दौरान प्रत्येक टीम के पास केवल दस विकेट ही होने चाहिए और पूरे मैच में केवल एक ही गेंद का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस नवीन व्यवस्था से विशेष रूप से डे-नाइट मैचों में ओस के प्रभाव के कारण टॉस की भूमिका न्यूनतम हो जाएगी और दोनों ही प्रतिस्पर्धी टीमों को बल्लेबाजी तथा गेंदबाजी के लिए समान परिस्थितियां मिल सकेंगी, जिससे खेल में संतुलन बना रहेगा।

