दीपावली का पर्व सनातन धर्म में सुख, समृद्धि और धन-वैभव का प्रतीक माना जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली की रात कुछ विशेष उपाय करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है. अगर आप भी इस दिवाली मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो ज्योतिषाचार्य द्वारा बताए गए इन उपायों के बारे में जान सकते हैं. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं.
दीपावली की रात मां लक्ष्मी की आराधना का महत्व
अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम बताते हैं कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. ऐसे में श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करने के साथ कुछ पारंपरिक उपाय भी करते हैं.
दिवाली से एक दिन पहले करें यह उपाय
पंडित कल्कि राम के अनुसार दीपावली से एक दिन पहले जटा वाला सूखा नारियल लेकर उसे किसी स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर रखें. नारियल को बहते जल या सरोवर में रखें. मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करते समय मन में मां लक्ष्मी का स्मरण करें और अगले दिन संध्याकाल में नारियल को लेने जाने का संकल्प करें. इस दौरान मौन रहें. दीपावली की शाम सूर्यास्त के समय नया लाल सूती कपड़ा लेकर नारियल के पास जाएं.
पंचोपचार पूजन और घर लाने का विधान
सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करते हुए ‘ॐ श्री गणेशाय नमः’ मंत्र का जाप करें. इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए नारियल को लाल कपड़े में लपेट लें और घर लेकर आएं. इसके बाद घर में दीप प्रज्वलित करें और भगवान गणेश तथा मां लक्ष्मी की प्रतिमा के पास नारियल रखकर पंचोपचार पूजन करें. इस दौरान धूप, दीप, पुष्प, गंध और नैवेद्य अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करें. ऐसा करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
तिजोरी की पूजा का भी है विशेष महत्व
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दीपावली के दिन धन की तिजोरी या धन रखने के स्थान की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. पूजा के बाद नारियल को धन रखने के स्थान पर रखने की परंपरा बताई जाती है. मान्यता है कि इससे घर में बरकत बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. इसके अलावा दीपावली की संध्याकालीन वेला में गोपाल सहस्रनाम या संतान गोपाल सहस्रनाम का 108 बार पाठ करने का भी धार्मिक महत्व बताया जाता है. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं.

